भोपाल , अक्टूबर 10 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना के तहत काम करने वाली हजारों महिलाओं ने चार महीने से मानदेय नहीं मिलने के विरोध में शनिवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी महिलाएं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने घंटों बैठी रहीं। उन्होंने लंबित भुगतान के लिए 10 नवंबर तक का समय देते हुए चेतावनी दी कि तय समय तक राशि खातों में नहीं आई तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में चक्काजाम किया जाएगा।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि वे काम करने के बावजूद मानदेय के लिए परेशान हैं, जबकि लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को राशि दी जा रही है। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को बुलाकर महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा कराई। समाधान का आश्वासन मिलने के बाद महिलाएं लौट गईं।
प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ (स्व-सहायता समूह एवं रसोइया संघ), मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लंबित भुगतान सहित 16 सूत्रीय मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि सांझा चूल्हा योजना की राशि तीन से चार महीने की देरी से मिलती है। महासंघ ने हर महीने की पांच तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने और रसोइया बहनों का मासिक मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने की मांग की है। साथ ही, पिछली लंबित राशि तत्काल जारी करने तथा सभी जिलों में भुगतान की निश्चित तारीख तय करने का आग्रह किया गया है।
महासंघ ने पोषण आहार योजना में पोर्टल पर दर्ज वास्तविक हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उसके अनुसार, कई समूहों को जरूरत का केवल 20 से 25 प्रतिशत खाद्यान्न मिल रहा है। महासंघ ने वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर 100 प्रतिशत खाद्यान्न आवंटन सुनिश्चित करने, खाद्यान्न उठाव में समूह अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट का उपयोग करने तथा नाश्ते और भोजन की निर्धारित दरों में महंगाई के अनुरूप वृद्धि करने की मांग की है।
मांगपत्र में रसोइया बहनों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने, करीब दो लाख 32 हजार रसोइया बहनों की जून माह की 15 दिनों की लंबित मजदूरी का वर्ष 2023 से 2026 तक की अवधि के लिए जांच के बाद एकमुश्त भुगतान करने तथा रसोइया बहनों को कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा समूहों के अध्यक्ष और सचिव को एक हजार रुपये मासिक मानदेय देने, रसोइया बहनों तथा समूह पदाधिकारियों के लिए 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा समूहों को खाद्यान्न और राशि का 100 प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
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