यमुनानगर , अक्टूबर 18 -- हरियाणा के यमुनानगर में एक ओर जहां विजयादशमी को लेकर लोगों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर यमुनानगर में सनातन धर्म मंदिर परिसर में मनचंदा परिवार पिछले एक महीने से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बनाने में जुटा है। अब यह काम अंतिम चरण में है।

यमुनानगर के सनातन धर्म मंदिर में मनचंदा परिवार पिछले चार पीढ़ियों से पुतले बनाने का काम कर रहा है। मोहिंदर मनचंदा ने बताया कि वह चौथी पीढ़ी हैं और अब उनका बेटा भी इस काम में लग गया है।

उन्होंने बताया कि काम की शुरुआत विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके की जाती है। उसके बाद ग्राउंड में पुतले स्थापित करते समय और दहन से पहले भी पूजा की जाती है। मोहिंदर मनचंदा का कहना है कि जब रावण जलता है तो काफी मायूसी होती है, क्योंकि एक महीने की मेहनत कुछ ही क्षणों में धू-धू कर जल जाती है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई बढ़ने से पुतले बनाने का सामान कपड़ा, सुतली, रस्सी, बांस काफी महंगा हो गया है। पुतलों में इस्तेमाल होने वाला सामान दोबारा इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए महंगाई का असर सीधा पुतलों की लागत पर पड़ रहा है।

विजयादशमी नजदीक आने के साथ ही पुतले बनाने के काम में तेजी लाई जा रही है। मनचंदा परिवार का कहना है कि महंगाई से रावण भी प्रभावित हुआ है।

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