देहरादून , अप्रैल 10 -- उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा है कि चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी चारधाम यात्रा को आपदा सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को गढ़वाल मंडल के सभी सात जनपदों के 50 विभिन्न स्थलों में व्यापक माॅक ड्रिल आयोजित की गई।

अलग-अलग आपदाओं के काल्पनिक परिदृश्यों में एक साथ संपन्न इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायु सेना, अर्द्धसैनिक बल, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, परिवहन, लोक निर्माण, विद्युत, दूरसंचार तथा अन्य संबंधित विभागों ने सहभागिता की।

मंत्री मदन कौशिक ने माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया।

उन्होंने वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जनपदों के इंसीडेंट कमाण्डरों, उत्तरदायी अधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों एवं मैदानी टीमों से संवाद में कहा कि चारधाम यात्रियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

श्री कौशिक ने कहा कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन तंत्र ने लंबा सफर तय किया है। राज्य ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, राहत एवं बचाव संसाधनों तथा संस्थागत समन्वय में लगातार सुधार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जो केवल आस्था का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान, अर्थव्यवस्था और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है।

उन्होंने मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये यात्रियों तक सभी एलर्ट पहुंचाने के निर्देश दिए ताकि वे सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने संवेदनशील एवं संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, संचार साधनों और राहत दलों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

माॅक ड्रिल में उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विनय रूहेला ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और आपात निकासी योजना को और प्रभावी बनाया जाए। यात्रा मार्गों पर भूस्खलन संभावित स्थलों, संकरे मार्गों, पुलों तथा संवेदनशील पड़ावों पर विशेष सतर्कता बरती जाए।

उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, मौसम विभाग और यात्रा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सभी जिलों में 24गुणा 7 कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन और संचार नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सूचना, समन्वय और राहत कार्य सुनिश्चित हो सके।

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस अभ्यास से मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ है तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और राहत-बचाव तंत्र की तैयारी और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि माॅक ड्रिल के माध्यम से संभावित चुनौतियों और जिन कमियों की पहचान हुई है, उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले दूर किया जाएगा।

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