देहरादून , सितंबर 03 -- उत्तराखंड में चारधाम यात्रा में 19 अप्रैल से 26 अगस्त के बीच बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारों धाम पहुंचे तीर्थयात्रियों ने पुनर्चक्रण के लिए 10 लाख से अधिक कंटेनर वापस किए हैं।
चारधाम यात्रा 2026 के दौरान पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए क्यूआर कोड वाली पानी की बोतलों और कंटेनरों को वापस करने की विशेष व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत यात्रियों को इन्हें दुकानदारों को लौटने पर राशि रिफंड की जाती हैडिजिटल डिपॉजिट रिफंड रिसाइकिल्ड सिस्टम (डीडीआरएस) के तहत तीर्थयात्री क्यूआर-कोड वाली बोतलें और पैकेजिंग जमा कर वापस करते हैं, ताकि हिमालयी तीर्थ यात्रा सर्किट को कचरे से मुक्त रखा जा सके।
डीडीआरएस जनसंपर्क अधिकारी आकांक्षा शर्मा ने गुरुवार को बताया कि डीडीआरएस के हिमालयन रीजन के सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) रोहित जोशी के अनुसार चारधाम यात्रा के इस वर्ष के पहले चार महीनों में यात्रियों ने 10 लाख से अधिक कंटेनर वापस किए हैं।
डिजिटल डिपॉजिट रिफंड स्कीम की इस पहल के तहत तीर्थयात्री चारों धाम मार्ग पर बनाए गए विशेष कलेक्शन पॉइंट्स पर क्यूआर-कोड वाली बोतलें और मल्टी-लेयर्ड पैकेजिंग (एमएलपी) वापस कर सकते हैं। इसका मकसद हिमालयी तीर्थ यात्रा मार्ग और वहां से निकलने वाली नदियों को पैकेजिंग कचरे से मुक्त रखना है। डीडीआरएस के 26 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार पिछले चार महीनों में बद्रीनाथ धाम में यात्रियों ने 3,04,771 कंटेनर वापस किए, जो 94 प्रतिशत रहा। गंगोत्री धाम में 2,72,864 कंटेनर वापस हुए, जो 97 प्रतिशत रहा। केदारनाथ धाम में 2,90,273 कंटेनर एकत्रित किए गए, जो 90 प्रतिशत रहा। वहीं, यमुनोत्री धाम में 1,49,292 कंटेनर एकत्रित किए गए, जो 92 प्रतिशत रहा। चारों धामों में कुल 10,17,200 कंटेनर एकत्रित किए गए और वसूली प्रतिशत 93.25 रही।
डीडीआरएस कलेक्शन में सबसे बड़ा हिस्सा बद्रीनाथ धाम का रहा, जो लगभग एक-तिहाई था। इसके बाद गंगोत्री, केदारनाथ और यमुनोत्री का स्थान रहा।
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