नैनीताल , अप्रैल 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चारधाम यात्रा मार्ग पर घोड़ों- खच्चरों पर होने वाली क्रूरता को रोकने और उनके उपचार के लिए रुद्रप्रयाग जिले में बनने वाले पशु अस्पताल के संबंध में शासन को जल्द स्वीकृति देने के निर्देश दिए हैं।

यही नहीं अदालत ने इस संबंध में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा करने के भी निर्देश सरकार को दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पशु प्रेमी गौरी मौलखी और दिल्ली निवासी अजय गौतम की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर आज सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी की ओर से कहा गया कि सरकार की ओर से अदालत के पिछले आदेश के क्रम में गढ़वाल परिक्षेत्र के आयुक्त की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी की ओर 16 और 24 मार्च को बैठक की जा चुकी है। बैठक में अनेक निर्णय लिए गए हैं।

यह भी कहा गया कि सरकार रुद्रप्रयाग में घोड़ों खच्चरों के लिए अस्पताल का निर्माण कर रही है। सरकार के पास प्रस्ताव लंबित है। इसे निर्धारित समय सीमा के तहत बनाया जाए।

सरकार की ओर से कहा गया कि 05.20 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है। नया प्रस्ताव सरकार के पास अनुमति के लिए गया है। इसके बाद अदालत ने सरकार को लंबित प्रस्ताव पर तीन सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार को पूर्व में जारी जारी एसपी की भी समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि दायर याचिकाओं में कहा गया है कि चारधाम यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों पर क्रूरता की घटना सामने आई हैं। उनके लिए चिकित्सा व्यवस्था का अभाव रहता है। बीमार घोड़ों के उपचार और जांच की उचित व्यवस्था नहीं होती है। यहां तक कि घोड़ों में फैलने वाली इंफुलेइंजा और ग्लैंडर्स जैसी संक्रामक बीमारियों की जांच और बचाव के लिए भी सरकार की ओर से कोई उचित उपाय नहीं की जाती हैं। इन गंभीर बीमारियों से घोड़ों की मौत हो जाती है। पिछली बार इन्फ्लुएन्जा के 680 मामले सामने आए थे।

यात्रा मार्ग पर दो घोड़ों के कंकाल बरामद हुए थे। यात्रा मार्ग पर स्वच्छता का भी विशेष ध्यान नहीं रखा जाता है। जगह जगह घोड़ों का मल बिखरा रहता है। इससे स्थानीय नदियां प्रदूषित हो रही हैं। तीर्थ यात्रा और पर्यटकों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

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