पौड़ी , जून 30 -- उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाने के लिए गढ़वाल मंडल प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर स्थित संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा कार्य कराने का निर्णय लिया है।
गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने मंगलवार को निर्माण एवं अवसंरचना से जुड़े विभागों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरे किए जाएं तथा विकास परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आयुक्त सभागार में आज आयोजित बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई सहित 14 विभागों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंडलायुक्त ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग पर चिह्नित गंभीर और अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र का तत्काल स्थायी उपचार किया जाए। जिन स्थानों पर प्रतिवर्ष भूस्खलन होता है, वहां दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने बाईपास, सुरंगों और अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अंतिम चरण में पहुंच चुकी परियोजनाओं को इसी वर्ष पूरा कर जनता को समर्पित किया जाए। साथ ही मंडल की सभी 41 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यों का विधानसभावार ब्यौरा, स्वीकृत बजट, कार्य प्रारंभ होने की तिथि और वर्तमान प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं की अद्यतन स्थिति भी प्रस्तुत करने को कहा गया।
मंडलायुक्त ने वर्षाकाल को देखते हुए सभी अधिकारियों को प्रतिदिन बंद और चालू सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराने तथा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मंडलीय अधिकारियों से नियमित स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करने को भी कहा।
बैठक में विभागवार समीक्षा के दौरान सिंचाई विभाग को हर्षिल क्षेत्र में नदी कटाव रोकने के कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने, लघु सिंचाई विभाग को बंद नहरों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना बनाने, पेयजल निगम को वन स्वीकृति एवं अन्य औपचारिकताओं के कारण लंबित योजनाओं को शीघ्र शुरू कराने तथा जल संस्थान को पेयजल आपूर्ति और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के सुधार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
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