देहरादून , अप्रैल 08 -- उत्तराखंड में बदरीनाथ विधानसभा से विधायक लखपत सिंह बुटोला ने बुधवार को यहां राजपुर रोड स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारी को लेकर राज्य सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

श्री बुटाेला ने यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम के कपाट खुलने जा रहे हैं। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले की अव्यवस्थाओं को आपके सामने रखना चाहता हूं।

उन्होंने कहा कि वह पांच अप्रैल को श्री बदरीनाथ की चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर बदरीनाथ गये थे। वहां पर चारधाम यात्रा शुरू होने में मात्र कुछ ही दिन शेष हैं लेकिन प्राधिकरण द्वारा कराये जा रहे कार्य अभी भी अधूरे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सीधे पीएमओ की निगरानी में होने के बावजूद कार्यों की गुणवत्ता एवं कार्य पूर्ण करने की समय सीमा में घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। हजारों लोग पहले ही दिन श्री नारायण के दर्शन हेतु आयेंगे लेकिन राज्य सरकार द्वारा अभी तक कार्य पूर्ण नहीं कराये गये हैं।

विधायक बुटोला ने कहा कि जब चारधाम यात्राओं को लेकर बैठकें आहूत की जाती हैं उसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि व क्षेत्रीय विधायक आमंत्रित किया जाता रहा है तथा ऐसा न करने के कारण मूल समस्यायें रेखांकित एवं निस्तारित नहीं हो पाती हैं। उन्होंने कहा कि श्री बदरीनारायण धाम में हो रहे निर्माण कार्यों की वजह से अलकनन्दा नदी की धारा का प्रवाह ब्रह्मकपाल एवं तत्व कुंड की तरफ हो गया है। जिस कारण ब्रह्मकपाल, तप्त कुंड एवं बदरीनारायण मंदिर को गम्भीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। लगभग 1.5 किलोमीटर तक अलकनन्दा नदी की चौड़ाई तीन मीटर तक कम कर दी गई है।

उन्हाेंने कहा कि अलकनन्दा नदी का नैसर्गिक प्रवाह खत्म किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य एवं स्थानीय लोगों को भविष्य में खतरा उत्पन्न हो सकता है। मास्टर प्लान में बदरीनाथ प्राधिकरण के द्वारा श्री बदरीनारायण मंदिर परिसर के चारों ओर की बसायत को तोडकर खंडहर बनाये गये हैं, उसकी समय सीमा पूरी होने के बाद भी मन्दिर के चारों ओर सौन्दर्यीकरण नहीं हो पाया है।

श्री बदरीनारायण के दर्शन हेतु मंदिर जाने वाले पथ का निर्माण कार्य अभी तक आधा-अधूरा पड़ा है। देव डोली के पौराणिक रास्ते का निर्माण कार्य भी अभी तक प्रारम्भ नहीं हुआ है। श्री बदरीनारायण की पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पंचधाराओं का रखरखाव नहीं किया जा रहा है जिस कारण धाराओं का प्राकृतिक स्रोत खतरे की जद में आ गये हैं।

श्री बुटोला ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारण को तुरंत हटाया जाना चाहिए। क्योंकि सनातन धर्म में इसका कहीं भी यह प्रावधान नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल को हमेशा खुला होना चाहिए, साथ ही ऑफलाईन रजिस्ट्रेशन की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने मांग उठाई कि वाहन चालकों को दिया जाने वाला ग्रीन कार्ड कम से कम छह माह के लिये दिया जाय। चारधाम यात्रियों एवं वाहन चालकों को जगह-जगह वेरीकेट पर नहीं रोका जाय।

क्षेत्र के मास्टर प्लान की समिति में स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों का भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। चारधाम यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले सभी होटल व्यवसाय,ढाबा,रेस्टोरेंट को गैस आपूर्ति की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो ।

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