सिलीगुड़ी , अगस्त 28 -- टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि पिछले पांच-छह हफ्तों में चाय की नीलामी कीमतों में भारी गिरावट ने असम और पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को लेकर खासी चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसके अलावा मौजूदा फसल सीजन के दौरान अचानक आई बाढ़, अत्यधिक गर्मी और गंभीर कीट व बीमारी के हमलों के कारण उत्पादन से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं।

एसोसिएशन की अध्यक्ष शैलजा मेहता ने कहा कि चाय उद्योग एक "गंभीर सच्चाई" का सामना कर रहा है क्योंकि नीलामी की गिरती कीमतों से चाय उद्योग की वित्तीय स्थिरता और नकदी की स्थिति को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।

वर्ष 2026-27 के लिए हुयी बिक्री से पता चला है कि उत्तर भारत के तीन प्रमुख चाय नीलामी केंद्रों कोलकाता, गुवाहाटी और सिलीगुड़ी में चाय की कीमतों में 27 से 34 प्रतिशत के बीच कीमतों में काफी गिरावट आई है।

कोलकाता टी ट्रेडर्स एसोसिएशन की नीलामी में, औसत सीटीसी चाय की कीमत 291.27 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 238.77 रुपये हो गई, जो दो महीने से भी कम समय में 53 रुपये या लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट है।

गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में, औसत सीटीसी कीमत 264.89 रुपये से घटकर 221.57 रुपये हो गई, जो लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट है।

सिलीगुड़ी में भी लगभग आठ प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जहां कीमतें 201.80 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 182.30 रुपये हो गईं।

एसोसिएशन ने कहा कि इस गिरावट का कारण ज़रूरत से ज़्यादा सप्लाई नहीं है। हालांकि टी बोर्ड के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले साल की तुलना में जून 2026 तक उत्तर भारत के उत्पादन में लगभग एक करोड़ 60 लाख किलोग्राम या पांच प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई थी लेकिन बाद में फसल उत्पादन दबाव में आ गया।

सदस्य चाय बागानों के आंकड़ों से संकेत मिला है कि जुलाई में फसल में अनुमानित 8 प्रतिशत की गिरावट आई है, और अगस्त में भी इसी तरह की गिरावट की उम्मीद है। एसोसिएशन ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अगस्त के अंत तक उत्तर भारत में कुल उत्पादन में लगभग 80 लाख किलोग्राम की कमी हो सकती है।

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