बैतूल , जुलाई 3 -- जैन संत समय सागर जी महाराज अपने संघ के साथ आज शुक्रवार को बैतूल जिले की मुलताई सीमा में पहुंचे। नागपुर से भोपाल में प्रस्तावित चातुर्मास के लिए विहार कर रहे संत के आगमन पर सकल जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।

जैन समाज के प्रतिनिधि संदीप जैन ने बताया कि संत समय सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश खंभारा-तुमडीटोल क्षेत्र से हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने जयघोष के साथ उनका अभिनंदन किया और धर्मलाभ प्राप्त किया।

संत समय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आत्मशुद्धि, संयम और साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक साधारण पत्थर को तराशकर पूजनीय स्वरूप प्रदान किया जाता है, उसी प्रकार मनुष्य भी तप, त्याग, संयम और सद्गुणों को अपनाकर श्रेष्ठ एवं वंदनीय बन सकता है।

उन्होंने कहा कि बाहरी वैभव की अपेक्षा आत्मिक विकास अधिक महत्वपूर्ण है। जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति होना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से लोभ, क्रोध, अहंकार और मोह जैसे विकारों से दूर रहकर धर्म, करुणा और सदाचार का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।

प्रवचन के दौरान उन्होंने पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संयम और साधना का मार्ग आत्मोन्नति का श्रेष्ठ माध्यम है तथा संतों का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।

संदीप जैन ने बताया कि शनिवार सुबह मुलताई में संत समय सागर जी महाराज का विधिवत स्वागत किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु उनके दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। दोपहर में वे अपने संघ के साथ भोपाल के लिए विहार करेंगे, जहां उनका चातुर्मास प्रस्तावित है।

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