अगरतला , अगस्त 18 -- पूर्वोत्तर राज्यों के चकमा समुदाय के नेताओं ने केंद्र सरकार से बंगलादेश को की जाने वाली बिजली और ईंधन की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोकने और बंगलादेश के चटगांव के पहाड़ी क्षेत्र को वापस लेने का आग्रह किया है।

यह मांग बंगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की उस कथित टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और शरीफ उस्मान हादी की हत्या के अन्य आरोपियों का प्रत्यर्पण नहीं होता, तब तक वे भारत का दौरा नहीं करेंगे।

चकमा स्वायत्त जिला परिषद के सदस्य एवं विधायक रसिक मोहन चकमा, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और ह्यूमैनिटी प्रोटेक्शन फोरम के अध्यक्ष प्रो. गौतम चकमा, अरुणाचल प्रदेश के चकमा हाजोंग एल्डर्स फोरम के प्रीतिमय चकमा और चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सुहास चकमा सहित अन्य नेताओं ने तारिक रहमान के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

चकमा नेताओं ने केंद्र सरकार से 'भारत-बंगलादेश मैत्री पाइपलाइन' को तुरंत निलंबित करने का आह्वान किया है, जिसके तहत भारत बंगलादेश को प्रतिवर्ष 1,80,000 टन डीजल की आपूर्ति करता है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उपजी बाधाओं के बावजूद, भारत ने इस वर्ष मार्च और अप्रैल के महीनों में ही बंगलादेश को 30,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति कर दी थी।

भारत की ऊर्जा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने का उल्लेख करते हुए प्रो. गौतम चकमा ने 16 अगस्त को सरकार द्वारा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए रसोई गैस (एलपीजी) के नए अधिकतम उत्पादन लक्ष्य तय करने के फैसले की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश की अपनी ऊर्जा संबंधी संवेदनशीलता को उजागर करता है।

इसके साथ ही उन्होंने झारखंड के गोड्डा स्थित अडाणी पावर प्लांट से बंगलादेश को निर्यात की जाने वाली बिजली को भी रोकने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के अंत तक बंगलादेश को यह बिजली निर्यात लगभग 2.25 अरब किलोवाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

चकमा नेताओं ने स्पष्ट कहा कि बंगलादेश द्वारा प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे के साथ जोड़ी गई शर्तें भारत के प्रति अनादर दर्शाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने चटगांव पहाड़ी क्षेत्र को पाकिस्तान को सौंपने की ऐतिहासिक भूल को सुधारने के लिए आवश्यक उपाय करने की मांग की। उनका कहना है कि यह मुख्य रूप से एक गैर-मुस्लिम बहुल क्षेत्र था जिसे बंटवारे के समय पाकिस्तान को दे दिया गया था।

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