इटावा , अक्टूबर 09 -- समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक और धरतीपुत्र के नाम से लोकप्रिय मुलायम सिंह यादव को चंबल घाटी में डाकुओं के आतंक के खिलाफ चलाए गए अभियान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके मुख्यमंत्रित्वकाल में पुलिस ने दस्यु गिरोहों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप चंबल क्षेत्र में डाकुओं का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो गया।
चंबल घाटी में दशकों तक डाकुओं का आतंक रहा। लूटपाट, डकैती और अपहरण जैसी वारदातों से इलाके के लोग परेशान रहते थे। स्थिति यह थी कि लोग दिन में भी बीहड़ क्षेत्रों में जाने से डरते थे। कई प्रयासों के बावजूद दस्यु गिरोहों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा था। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पुलिस ने डाकुओं के खिलाफ अभियान तेज किया। इस दौरान कई कुख्यात दस्यु मारे गए, जबकि अनेक गिरफ्तार हुए और कई ने आत्मसमर्पण कर दिया।
डाकुओं के खिलाफ अभियान की शुरुआत से जुड़ा एक चर्चित प्रसंग कुख्यात दस्यु सरगना निर्भय गुर्जर से संबंधित है। उस समय निर्भय गुर्जर का चंबल के बीहड़ों में काफी आतंक था। उसने एक मीडिया साक्षात्कार में मुलायम सिंह यादव को अपना बड़ा भाई और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को छोटा भाई बताया था। इस बयान के बाद दस्यु गिरोहों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज किए जाने की चर्चा रही। बताया जाता है कि इसके बाद मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को डाकुओं के सफाए के निर्देश दिए।
चंबल क्षेत्र में दस्यु गिरोहों के खिलाफ चलाए गए अभियान में निर्भय गुर्जर भी पुलिस के निशाने पर आया। सात नवंबर 2005 को औरैया जिले के अजीतमल क्षेत्र में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया। निर्भय गुर्जर की मौत को चंबल के कुख्यात दस्यु गिरोहों के खिलाफ अभियान की एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
इसी दौर में कुख्यात दस्यु सरगना राम आसरे उर्फ फक्कड़ और कुसमा नाइन ने अपने गिरोह के नौ सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश छोड़कर मध्य प्रदेश के रावतपुरा सरकार आश्रम में मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसी तरह दस्यु सरगना अरविंद गुर्जर और रामवीर गुर्जर ने भी अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश में आत्मसमर्पण किया। पुलिस की लगातार कार्रवाई से छोटे-बड़े कई दस्यु गिरोह कमजोर पड़े और अनेक सदस्यों ने आत्मसमर्पण कर दिया या गिरफ्तार कर लिए गए।
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सीओ रामनाथ सिंह के अनुसार, वर्ष 2004 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के समय चकरनगर, लवेदी, भरेह, बकेवर और लखना समेत आसपास के क्षेत्रों में डकैती गिरोह सक्रिय थे। इन गिरोहों का इलाके में व्यापक प्रभाव था। सरकार के निर्देश के बाद पुलिस ने अभियान चलाकर दस्यु गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।
इटावा के वरिष्ठ पत्रकार वीरेश मिश्रा बताते हैं कि चंबल घाटी में डाकुओं के आतंक की चर्चा दूर-दूर तक थी। लोग दिन में भी बीहड़ क्षेत्र में जाने से कतराते थे। सरकार ने जब दस्यु गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया तो पुलिस अभियान का असर दिखाई देने लगा और धीरे-धीरे डाकुओं का प्रभाव समाप्त होता गया।
बताया जाता है कि दस्यु गिरोहों के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मुलायम सिंह यादव ने इटावा में दलबीर सिंह चौधरी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया था। उनकी निगरानी में पुलिस ने दस्यु गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक जीवन में किसानों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के हितों से जुड़े मुद्दों के साथ कानून-व्यवस्था भी महत्वपूर्ण विषय रहा। चंबल घाटी में डाकुओं के खिलाफ चलाए गए अभियान को उनके शासनकाल की प्रमुख कार्रवाइयों में गिना जाता है। लंबे समय तक भय और असुरक्षा से जूझने वाले इस क्षेत्र में दस्यु गिरोहों के कमजोर पड़ने से आम लोगों को राहत मिली।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित