चंपावत , अगस्त 23 -- उत्तराखंड के चंपावत में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले में जिला प्रशासन ने गंभीर रुख अख्तियार करते हुए रविवार को एक जांच कमेटी का गठन किया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) देवेश चौहान के नेतृत्व में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है और अभिलेखों एवं सभी तथ्यों का बारीकी से परीक्षण कर जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

जिलाधिकारी कुमार ने कहा कि इस मामले की सभी कोण से जांच की जाएगी और कमेटी को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि 22 वर्षीय प्रियंका ने विगत 18 अगस्त को उप जिला चिकित्सालय, लोहाघाट की ओपीडी में परामर्श लिया था। जहां उन्होंने बताया कि दो दिनों से गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस नहीं हो रही है। 12 अगस्त की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में शिशु सामान्य पाया गया था, जिसमें हृदय गति 135 प्रति मिनट तथा फीटल एवं कार्डियक मूवमेंट्स भी दर्ज किया गया था।

गर्भावस्था लगभग 34 सप्ताह की बताई गई। वहीं 18 अगस्त की निजी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में कार्डियक एक्टिविटी अनुपस्थित मिली और फीटल डिमाइस दर्ज किया गया।

डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि दोनों रिपोर्टों से 12 अगस्त को शिशु के जीवित होने और 18 अगस्त को फीटल डिमाइस की पुष्टि होती है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि मृत्यु दो सप्ताह पहले ही हो गई थी।

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