नैनीताल , अगस्त 21 -- उत्तराखंड के चंपावत जिले में तैनात होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में है। तहसीलदार कसौली ने 11 अक्टूबर 1999 को उन्हें हिमाचल प्रदेश की छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया था। विवाह के बाद उन्होंने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को उत्तराखंड की धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 प्राप्त किया।

इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ। वर्तमान में वह चंपावत जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी में एनएचएम के तहत संविदा पर कार्यरत है।

बताया जा रहा है कि खैराना, सितारगंज निवासी अनिल कुमार कंबोज की शिकायत पर जांच के लिए जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल तथा जिला होम्योपैथिक अधिकारी चंपावत शामिल थे।

कमेटी की बैठक गत तीन अगस्त को हुई। कमेटी ने उच्च न्यायालय के साथ ही उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की। कमेटी के अनुसार अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ मूल राज्य के आधार पर ही प्रांतीय सेवाओं में अनुमन्य है। विवाह के बाद दूसरे राज्य में माइग्रेशन के आधार पर वहां की राज्य सेवाओं में आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हल्द्वानी तहसील से जारी प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है। साथ ही को प्रमाण पत्र को जब्त करने के निर्देश दे दिए हैं।

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