चित्रकूट , अगस्त 12 -- उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में भरतकूप के निकट ग्राम गोंडा स्थित चंदेलकालीन दो प्राचीन मंदिरों के क्षतिग्रस्त और दरारयुक्त मंडप के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा करीब 15 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है।

संरक्षण कार्य के तहत मंदिर के मंडप के भग्नावशेष में लगे भारी पत्थरों को ऊपरी हिस्से से नींव तक वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। इसके बाद इन पत्थरों को उनके मूल स्वरूप और संरचना के अनुरूप पुनः स्थापित किया जाएगा। मंदिर के क्षतिग्रस्त प्लेटफॉर्म और सीढ़ियों का भी संरक्षण किया जाएगा।

इसके अलावा मंदिर परिसर की चारदीवारी की मरम्मत कर उस पर ग्रिल लगाई जाएगी, ताकि स्मारक को सुरक्षित रखा जा सके। संरक्षण कार्य में प्राचीन स्थापत्य शैली और मंदिर की मूल संरचना का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए राजस्थान से विशेष कारीगरों की टीम बुलाई गई है। कारीगर प्राचीन स्थापत्य तकनीक और संरचना को ध्यान में रखते हुए संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य करेंगे। कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा किए जाने का लक्ष्य है। यह संरक्षण कार्य चंदेलकालीन ऐतिहासिक धरोहर को उसके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य विरासत संरक्षित होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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