चंडीगढ़ , जुलाई 31 -- चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में मानसून से पहले की तैयारियों, जलभराव, सफाई व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि बारिश से पहले नालों और पाइपों की प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि शहर में जलभराव की समस्या न हो। उन्होंने सफाई के लिए खरीदी गई मशीनों के उपयोग का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि केवल मशीनें खरीदना पर्याप्त नहीं है, उनका जमीनी स्तर पर प्रभावी इस्तेमाल भी जरूरी है।
मेयर ने ठेकेदारों को बार-बार कई काम दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर के बेरोजगार युवाओं को भी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और विकास कार्यों में पारदर्शिता आए।
भाजपा पार्षद कंवर राणा ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है, ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते, फिर भी उन्हें बार-बार टेंडर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड के सेक्टर-45 स्थित मोटर मार्केट में बारिश के दौरान भारी जलभराव हुआ, जो सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति का प्रमाण है।
कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने आरोप लगाया कि सदन से पारित लगभग 20 हजार लीटर पानी से संबंधित प्रस्ताव को प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। उन्होंने ठेकेदारों और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की।
भाजपा पार्षद एवं पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर कंवरपाल राणा ने भी अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने मुख्य अभियंता पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि कई टेंडर तीन-चार बार प्रयास के बाद भी पास नहीं होते, जबकि कुछ ठेकेदारों को बार-बार काम दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा चुकी है और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नगर निगम के संसाधनों का उपयोग शहर के विकास कार्यों पर करने की मांग की।
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