चंडीगढ़ , अगस्त 14 -- केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि राशन वितरण व्यवस्था को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चंडीगढ़में सीबीडीसी वॉलेट आधारित व्यवस्था का पूरा रोलआउट किया गया है। इसके तहत लाभार्थियों के वॉलेट में राशन की राशि जमा होगी, जिसे पैनल में शामिल राशन दुकानों पर स्कैन कर गेहूं और चावल खरीदा जा सकेगा।

चंडीगढ़ में करीब 500 राशन दुकानों को इस व्यवस्था के लिए पैनल में शामिल किया गया है। लाभार्थी अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार बेहतर गुणवत्ता का गेहूं या चावल खरीद सकेंगे। यदि निर्धारित राशि से अधिक कीमत का अनाज लेना है तो लाभार्थी अतिरिक्त पैसा देकर उसे खरीद सकता है। सीबीडीसी वॉलेट में जमा राशि का इस्तेमाल केवल अनाज खरीदने के लिए किया जा सकेगा।

श्री जोशी ने बताया कि गांधीनगर और पुड्डुचेरी में इसका पायलट प्रोजेक्ट पहले शुरू किया गया था। अब चंडीगढ़ से इसका पूरा रोलआउट किया गया है और धीरे-धीरे इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है। लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार, मोबाइल फोन और बैंक या जनधन खाते की लिंकिंग की व्यवस्था की गयी है।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से अपात्र राशन कार्डों की पहचान भी संभव होगी। दिवंगत व्यक्तियों या देश में मौजूद नहीं रहने वाले लोगों के नाम पर बने राशन कार्डों की जांच कर अपात्र नाम हटाये जाएंगे। चंडीगढ़ में करीब 10 प्रतिशत लोग अभी तक रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं आये हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी को बाहर करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पात्र लाभार्थियों को उनका हक देने की पहल है। सही दस्तावेजों के साथ आने वाले सभी पात्र लोगों को शामिल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक राशन दुकान व्यवस्था तुरंत बंद नहीं होगी, क्योंकि देश की बड़ी आबादी अभी भी राशन व्यवस्था पर निर्भर है। सीबीडीसी व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाने के साथ राशन की गुणवत्ता में सुधार करना है।

पंजाब में अनाज भंडारण को लेकर प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश में अनाज की शिफ्टिंग और निकासी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पंजाब और हरियाणा से होता है। पंजाब में 60 लाख टन क्षमता के गोदाम बनाने को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र ने पंजाब सरकार से गोदामों का निर्माण जल्द पूरा करने का आग्रह किया है। जरूरत पड़ने पर गोदाम किराए पर लेने का विकल्प भी रखा गया है और उसका भाड़ा केंद्र सरकार वहन करेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कही जा रही बात पर वह राजनीतिक बयान नहीं देना चाहते।

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