चंडीगढ़ , सितंबर 06 -- केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि जैव विविधता का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध रोजगार, प्राकृतिक संतुलन, जल स्रोतों की सुरक्षा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण से भी है। चंडीगढ़ में जैव विविधता संरक्षण को लेकर 16वीं राष्ट्रीय बैठक एवं दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसमें देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

श्री यादव ने कहा कि भारत मध्य एशियाई क्षेत्र में पक्षियों के प्रमुख आवागमन मार्ग का महत्वपूर्ण केंद्र है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की फंडिंग से बीएनएच के माध्यम से गिद्ध संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सहित अन्य पक्षियों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित 23 लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2030 तक की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। भूमि के मरुस्थलीकरण और क्षरण को रोकने के लिए भारत ने तीन करोड़ हेक्टेयर भूमि के पुनर्स्थापन का लक्ष्य रखा था, जिसमें करीब 2.2 करोड़ हेक्टेयर का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।

देशभर में करीब 2.77 लाख पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार किए गए हैं। बैठक में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जैव विविधता कानून में किए गए सुधारों पर चर्चा की जा रही है। एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग व्यवस्था के तहत जैव संसाधनों से होने वाले लाभ का उचित हिस्सा स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

हालिया बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं पर मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर पक्षियों और जैव विविधता पर भी पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी पर्यावरणीय गतिविधि से पहले मिट्टी की जांच और उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भारत आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) के माध्यम से तकनीक, क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और प्रकृति आधारित समाधानों को बढ़ावा दे रहा है। वहीं, उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले पर उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय के विचाराधीन होने के कारण इस पर नीतिगत टिप्पणी नहीं की जा सकती।

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