नयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल तक केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा।

इस शिविर की विषय वस्तु 'अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब- विकसित भारत एट2047' होगीशिविर के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डाॅ वीरेन्द्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा और रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिये पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किये जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पच्चीस अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। छब्बीस अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किये जाएंगे।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है। इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा।

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