चंडीगढ़ , जुलाई 16 -- चंडीगढ़ महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता दीपा दुबे ने शहर में नाबालिग बच्चियों और महिलाओं के लापता होने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
सुश्री दीपा दुबे ने गुरुवार को कहा कि संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में चंडीगढ़ से 18 वर्ष से कम आयु की 800 से अधिक लड़कियां लापता हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में महिलाओं के लापता होने की घटनाएं भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अधिकांश मामलों में करीब 97 प्रतिशत घटनाएं घर से भागने (रनअवे) से जुड़ी हैं, जिनमें किशोरियों की संख्या अधिक है। पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध, सामाजिक दबाव और अन्य व्यक्तिगत कारण ऐसे मामलों की प्रमुख वजह बताये जाते हैं।
सुश्री दीपा दुबे ने कहा कि वर्ष 2023-24 के दौरान चंडीगढ़ में कुल 4,069 लोगों के लापता होने के मामले दर्ज किये गये, जिनमें महिलाओं और किशोरियों की संख्या अधिक रही। एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2024 में 545 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए, जिनमें 354 लड़कियां और 191 लड़के शामिल थे। इनमें से 243 बच्चों का पता लगाया जा चुका है, जबकि 302 बच्चे अब भी लापता बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि लापता बच्चों और महिलाओं के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय हैं। परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में स्वयं संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान केवल नारा न रह जाये, बल्कि उसकी वास्तविक झलक जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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