चंडीगढ़ , अप्रैल 18 -- चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी तथा करण सिंह फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ए स्टेट्स मैन एंड ए सीकर पुस्तक पर शनिवार को एक विस्तृत एवं विचारोत्तेजक चर्चा का आयोजन गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में किया गया।

यह पुस्तक प्रख्यात राजनेता चिंतक एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व डॉ करण सिंह की अधिकृत जीवनी है, जिसमें उनके बहुआयामी जीवन, सार्वजनिक सेवा और आध्यात्मिक साधना को गहराई से प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ . करण सिंह के साथ डॉ . सुमिता मिश्रा, हर्बन्स सिंह, डॉ . ज्योत्स्ना सिंह, माधव कौशिक, रवि सिंह तथा अफान येसवीं उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलन भारतीय परंपरा में ज्ञान और चेतना के प्रकाश का प्रतीक माना जाता है, जिससे कार्यक्रम को औपचारिक रूप से प्रारंभ किया गया।

इसके उपरांत डॉ सुमिता मिश्रा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी, ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि डॉ करण सिंह स्वतंत्र भारत के ऐसे विलक्षण व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने शासन और आध्यात्मिकता के बीच अद्भुत संतुलन स्थापित किया। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे चिंतक हैं, जिन्होंने एक हाथ में उपनिषदों की आध्यात्मिक दृष्टि और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की लोकतांत्रिक भावना को समान रूप से धारण किया और दोनों के बीच कभी विरोधाभास नहीं होने दिया। उनका जीवन भारतीय सभ्यता की गहराई और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।

कार्यक्रम के दौरान पुस्तक के लेखक हर्बन्स सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस जीवनी को तैयार करने में उन्हें कई वर्षों का गहन अध्ययन, शोध और संवाद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक डॉ . कारण सिंह के जीवन के लगभग नौ दशकों की यात्रा को समेटती है जिसमें उनके राजपरिवार से जुड़े प्रारंभिक जीवन से लेकर भारतीय संसद, अंतरराष्ट्रीय मंचों और यूनाइटेड नतिओन्स तक की सक्रिय भूमिका का विस्तृत वर्णन है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ करण सिंह और आराधिका शर्मा के बीच हुआ संवाद रहा। इस विचारपूर्ण बातचीत में उनके जीवन के विभिन्न आयामों राजनीति, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक साधना पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी आंतरिक संतुलन और आध्यात्मिक चेतना को बनाए रखा। इस संवाद ने उपस्थित श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया और उन्हें जीवन के व्यापक दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सभी ने इस चर्चा को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। श्रोताओं ने प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान अपने प्रश्न रखे, जिनका डॉ . करण सिंह ने गंभीरता और सहजता से उत्तर दिया।

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