चंडीगढ़ , अक्टूबर 10 -- चंडीगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता एवं महासचिव राजीव शर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर इटली और जर्मनी के फासीवादी संगठनों से प्रेरणा लेने तथा निजी मिलिशिया जैसी व्यवस्था को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने अपने एक लेख में कहा है कि लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

श्री शर्मा ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और स्वतंत्र भारद्वाज नामक युवक से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण की धारणा से कुछ लोगों में कानून का भय कम हो सकता है।

उन्होंने डॉ. बीएस मुंजे की 1931 की इटली यात्रा और मुसोलिनी के संगठनों से उनके संपर्क का उल्लेख करते हुए संघ की संगठनात्मक विचारधारा पर सवाल उठाए। साथ ही, गोलवलकर और सावरकर के ऐतिहासिक बयानों का हवाला देकर फासीवादी विचारों के कथित प्रभाव पर चिंता जताई।

श्री शर्मा ने ग्राहम स्टेंस हत्याकांड, दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्याओं तथा मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराधों तथा लंबित मुकदमों पर भी चिंता व्यक्त की।

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