बैतूल , अगस्त 30 -- भीषण जलसंकट के दौरान बैतूल में घोघरी बांध से बुरहानपुर भेजे गए पानी का 37 लाख रुपये शुल्क अब तक जमा नहीं होने पर जलसंसाधन विभाग ने बुरहानपुर प्रशासन को नोटिस जारी किया है। विभाग ने राशि जमा कराने के लिए कहा है और स्पष्ट किया है कि भुगतान नहीं होने की स्थिति में भविष्य में बुरहानपुर को घोघरी बांध से पानी उपलब्ध कराने में कठिनाई आ सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब तीन माह पहले बुरहानपुर शहर में पेयजल संकट गहराने पर वहां के प्रशासन ने बैतूल जिला प्रशासन से पानी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। दोनों जिलों के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद घोघरी बांध से बुरहानपुर के लिए पानी छोड़ा गया था। निर्माणाधीन मेढ़ा बांध को संभावित नुकसान से बचाने के लिए चार स्थानों पर पाइप डालकर पानी निकालने की व्यवस्था की गई थी।

जलसंसाधन विभाग ने पाइप बिछाने और पानी उपलब्ध कराने में हुए खर्च की भरपाई के लिए बुरहानपुर प्रशासन को करीब 37 लाख रुपये का डिमांड नोट जारी किया था। विभाग को उम्मीद थी कि निर्धारित शुल्क मिलने से पाइप सहित अन्य व्यवस्थाओं पर हुए खर्च की भरपाई हो जाएगी, लेकिन डिमांड नोट जारी होने के करीब एक माह बाद भी राशि जमा नहीं हुई।

जलसंसाधन विभाग के एसडीओ बलवंत मर्सकोले ने बताया कि बुरहानपुर प्रशासन की ओर से अब तक 37 लाख रुपये जमा नहीं किए गए हैं। इस संबंध में नोटिस जारी कर राशि जमा कराने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि राशि जमा होने के बाद ही भविष्य में बुरहानपुर को पानी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करते हुए राशि जमा कराई जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मई में बुरहानपुर शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले एनीकट में पानी खत्म हो गया था। शहर में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण अंतिम विकल्प के रूप में करीब 229 किलोमीटर दूर बैतूल स्थित घोघरी बांध से पानी लिया गया था। दोनों जिले ताप्ती नदी से जुड़े हैं और ताप्ती नदी का उद्गम बैतूल जिले में होता है।

भौगोलिक स्थिति के कारण भी पानी को बुरहानपुर तक पहुंचाने में मदद मिली। बैतूल की समुद्र तल से ऊंचाई करीब 653 से 658 मीटर, जबकि बुरहानपुर की ऊंचाई लगभग 232 से 247 मीटर है। दोनों स्थानों के बीच करीब 1200 फीट का ऊंचाई अंतर होने से इसी ढलान का लाभ उठाकर घोघरी बांध से छोड़ा गया पानी पाइपलाइन के माध्यम से बुरहानपुर तक पहुंचाया गया था।

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