ग्वालियर , जून 28 -- मध्यप्रदेश के घाटीगांव सोन चिरैया अभ्यारण्य में लगभग 18 वर्ष बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (सोन चिरैया) की पुनर्स्थापना की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग की समीक्षा बैठक में राजस्थान से सोन चिरैया लाकर घाटीगांव तथा गांधी सागर अभ्यारण्य में बसाने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 1981 में स्थापित 512 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले घाटीगांव अभ्यारण्य में कभी 30 से 35 सोन चिरैया निवास करती थीं। वर्ष 2001 की गणना में यहां 18 पक्षी दर्ज किए गए थे, लेकिन वर्ष 2018 की गणना में एक भी सोन चिरैया नहीं मिली।
वन विभाग के अनुसार घाटीगांव-शिवपुरी रेल लाइन निर्माण, बिजली के तारों का जाल तथा अवैध उत्खनन जैसी गतिविधियों के कारण इस दुर्लभ पक्षी का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ और इसकी संख्या लगातार घटती चली गई।
प्रस्तावित पुनर्स्थापना योजना के तहत राजस्थान सरकार के समन्वय से पहले चरण में छह से आठ सोन चिरैया घाटीगांव और गांधी सागर अभ्यारण्य में छोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही घासभूमि के विकास, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा अभ्यारण्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है।
योजना के अंतर्गत घासभूमि के विकास, बिजली लाइनों के भूमिगतकरण, ड्रोन निगरानी, शिकार रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से पर्यटन गतिविधियां विकसित करने का भी प्रस्ताव है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सोन चिरैया की वापसी से घासभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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