दरभंगा , अक्टूबर 25 -- दरभंगा प्रसूति एवं स्त्री रोग सोसाइटी की शैक्षणिक बैठक में भारत समेत विश्व में घटती प्रजनन दर तथा इसके सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दूरगामी प्रभावों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलू सिंह ने बदलते वैश्विक जनसांख्यिकीय परिदृश्य और भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 1975 से 2025 के बीच विश्व की जनसंख्या लगभग दोगुनी हुई, जबकि औसत प्रजनन दर लगभग आधी रह गई। भारत में भी सत्तर के दशक के मध्य में प्रति महिला पांच से अधिक बच्चों की प्रजनन दर घटकर अब लगभग 1.9 रह गई है। हालांकि, युवा आबादी का बड़ा आधार होने के कारण भारत की जनसंख्या में अगले कुछ दशकों तक वृद्धि जारी रहने की संभावना है।

डॉ. सिंह ने बताया कि दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, इटली और यूरोप के कई देशों में प्रजनन दर काफी नीचे पहुंच गई है। दक्षिण कोरिया में यह दर लगभग 0.75 रहना विशेष चिंता का विषय है। वहीं, अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ देशों में प्रजनन दर अपेक्षाकृत अधिक है। इस प्रकार विश्व एक ओर जनसंख्या वृद्धि, तो दूसरी ओर जनसंख्या के वृद्ध होने की चुनौती का सामना कर रहा है।उन्होंने कहा कि घटती प्रजनन दर के प्रमुख कारणों में महिलाओं की बढ़ती शिक्षा, विवाह एवं प्रथम गर्भधारण की आयु में वृद्धि, शहरीकरण, बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा पर बढ़ता खर्च, रोजगार एवं आवास संबंधी असुरक्षा, परिवार नियोजन के साधनों की उपलब्धता तथा छोटे परिवारों के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता शामिल है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ जैविक प्रजनन क्षमता में कमी भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।

विशेषज्ञों ने कहा कि लंबे समय तक प्रजनन दर बेहद कम रहने से युवाओं और कामकाजी आबादी का अनुपात घट सकता है, जबकि वृद्धजनों की संख्या बढ़ेगी। इससे पेंशन, वृद्धजन स्वास्थ्य सेवाओं, कार्यबल और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

आधुनिक प्रजनन विज्ञान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष 2025 में अमेरिका में थैडियस डैनियल पियर्स का जन्म ऐसे भ्रूण से हुआ, जिसे लगभग 31 वर्षों तक जमाकर सुरक्षित रखा गया था। यह उदाहरण लंबे समय तक भ्रूण संरक्षण और सहायक प्रजनन तकनीक की संभावनाओं को दर्शाता है। भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 28 के तहत दाता के जनन कोशों अथवा भ्रूण के संरक्षण की अवधि से संबंधित प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

बैठक में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत प्रसाद, डॉ. ओम प्रकाश, फॉग्सी अध्यक्ष डॉ. कुमुदनी झा, सचिव डॉ. राजश्री पूर्वे, दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा महासेठ, डॉ. अलका द्विवेदी, डॉ. नूतन राय, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. अनीता कुमारी, डॉ. अलका मिश्रा और डॉ. वसुधारानी सहित अनेक चिकित्सक तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित थे।

बैठक में महिला स्वास्थ्य और बदलते प्रजनन व्यवहार के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों में मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य, वृद्धजन देखभाल और बदलती जनसंख्या संरचना को समग्र रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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