ग्वालियर , फरवरी 16 -- मध्यकालीन युग के महान संगीतज्ञ बैजू बावरा की स्मृति में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा 17 फरवरी से तीन दिवसीय बैजू बावरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। ध्रुपद गायन परंपरा को समर्पित यह महोत्सव विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा।

विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे एवं कुलसचिव अरूण सिंह चौहान ने आज पत्रकारों को बताया कि महोत्सव का शुभारंभ ललित मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा, बिहार की संकाय अध्यक्ष प्रो. लावण्या कीर्ति सिंह काव्या करेंगी। वे "भारतीय ज्ञान परंपरा: ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत एवं वर्तमान स्वरूप" विषय पर उद्बोधन देंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. सहस्त्रबुद्धे करेंगी।

उन्होंने बताया कि 17 फरवरी को ध्रुपद विषय पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें पद्मश्री उस्ताद बासिफुद्दीन डागर, नई दिल्ली विषय विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन देंगे। पखावज पर पंडित मोहन श्याम शर्मा, नई दिल्ली व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन दोपहर दो बजे से सांगीतिक प्रस्तुतियां होंगी, जिसमें योगिनी तांबे, ग्वालियर ध्रुपद गायन प्रस्तुत करेंगी तथा पखावज पर संगति जगत नारायण शर्मा देंगे। उस्ताद बासिफुद्दीन डागर की प्रस्तुति में पखावज संगति पंडित मोहन श्याम शर्मा करेंगे।

18 फरवरी को प्रातः 11 बजे से धमार विषयक कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें डॉ. विशाल जैन, प्रयागराज विषय विशेषज्ञ होंगे। दोपहर दो बजे से सुरबहार वादन की प्रस्तुति डॉ. श्याम रस्तोगी देंगे तथा पखावज पर संगति जगत नारायण शर्मा करेंगे।

19 फरवरी को प्रातः 11 बजे ध्रुपद विषय पर कार्यशाला होगी, जिसमें पद्मश्री पंडित ऋत्विक सान्याल, वाराणसी मार्गदर्शन देंगे। दोपहर दो बजे से सांगीतिक प्रस्तुतियों में आदित्य शर्मा, ग्वालियर ध्रुपद गायन प्रस्तुत करेंगे, जिनके साथ पखावज पर संगति जयवंत गायकवाड देंगे। इसके उपरांत पद्मश्री पंडित ऋत्विक सान्याल ध्रुपद गायन प्रस्तुत करेंगे तथा पखावज पर संगति आदित्य दीप देंगे। पत्रकार वार्ता में संयोजक एवं सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ. पारूल दीक्षित तथा मीडिया प्रभारी कुलदीप पाठक भी उपस्थित थे।

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