मुंबई , जनवरी 20 -- बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों में शुमार परवीन बॉबी ने फिल्मी पर्दे पर अपनी शोख अदाओं और खूबसूरती से हिंदी सिनेमा को बदलकर रख दिया था।

अपने समय की एक फैशन आइकन और बॉक्स ऑफिस की सनसनी, परवीन का 20 जनवरी, 2005 को 50 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, और वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गईं जो जितनी शानदार थी उतनी ही दुखद भी थी।

परवीन का जन्म 4 अप्रैल, 1954 को एक कुलीन परिवार में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक की शुरुआत में फिल्मों में प्रवेश करने से पहले एक मॉडल के रूप में अपना पेशेवर जीवन शुरू किया। अपने पश्चिमी पहनावे, आत्मविश्वास से भरे व्यवहार और अपरंपरागत भूमिकाओं के चयन के साथ, वह एक अलग पहचान रखती थीं - साहसी, आधुनिक और निडर व्यक्तित्व वाली।

परवीन ने सबसे पहले मजबूर (1974) से सुर्खियां बटोरीं, लेकिन दीवार (1975) ने उन्हें एक सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया। अनीता के रूप में उनके अभिनय ने नैतिक सीमाओं को चुनौती दी और मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में महिलाओं के चित्रण को बदल दिया। इसके बाद उन्होंने अमर अकबर एंथोनी, सुहाग, काला पत्थर, शान, क्रांति, कालिया और नमक हलाल जैसी कई हिट फिल्में दीं, जिनमें उन्होंने उस समय के सबसे बड़े सितारों के साथ काम किया।

फिल्म जगत से इतर भी परवीन का प्रभाव उतना ही गहरा था। फैशन की दुनिया में एक अग्रणी हस्ती के रूप में, वह अक्सर प्रमुख फिल्म पत्रिकाओं के कवर पेज और बड़े विज्ञापन अभियानों में नज़र आती थीं। 1976 में, वह टाइम पत्रिका के कवर पेज पर आने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं, जो उस समय एक अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय सम्मान था। उनकी पेशेवर सफलता अक्सर उनके रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सार्वजनिक जांच-पड़ताल से प्रभावित रही। परवीन अविवाहित रहीं और अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा, कबीर बेदी और फिल्म निर्माता महेश भट्ट के साथ उनके संबंधों पर खूब चर्चा हुई।

वर्ष1980 के दशक की शुरुआत में सार्वजनिक जीवन से उनके दूर होने से कई अफवाहें फैलीं, जिनमें मानसिक बीमारी से जूझने की उनकी लंबी और दर्दनाक कहानी भी शामिल थी, जिसने धीरे-धीरे उन्हें सिनेमा और दुनिया दोनों से अलग कर दिया।

सिनेमा जगत छोड़ने के बाद, परवीन बाबी ने लेखन, कला, संगीत और बौद्धिक गतिविधियों में खुद को लीन कर लिया और मुंबई में एकांत जीवन व्यतीत करना चुना। फिल्म में उनकी अंतिम उपस्थिति 1991 में आई फिल्म 'इरादा' में थी।

जनवरी 2005 में परवीन अपने मुंबई स्थित आवास में मृत पाई गईं। उनकी मृत्यु के कई दिनों बाद, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मधुमेह के कारण अंगों के फेल होने का उल्लेख किया गया, और किसी भी प्रकार की साजिश का कोई सबूत नहीं मिला। अकेलेपन में हुई उनकी मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर दिया और मानसिक स्वास्थ्य तथा सेलिब्रिटी जीवन के छिपे हुए दुष्परिणामों की ओर नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया।

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