ग्रेटर नोएडा , मई 03 -- उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्धनगर क्षेत्र ग्रेटर नोएडा पश्चिम स्थित फ्यूजन होम्स सोसाइटी में मरम्मत शुल्क में कथित बढ़ोतरी को लेकर निवासियों और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
सैकड़ों परिवारों ने रविवार को सोसायटी परिसर में एकत्र होकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन पर मनमाने तरीके से शुल्क बढ़ाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने कहा कि हाल ही में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने कॉमन एरिया इलेक्ट्रिसिटी चार्ज और वॉटर चार्ज के नाम पर मरम्मत शुल्क में वृद्धि कर दी। यह फैसला बिना किसी आम सभा की बैठक बुलाए लिया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसी किसी भी बढ़ोतरी के लिए जनरल बॉडी मीटिंग में प्रस्ताव रखना और बहुमत से मंजूरी लेना जरूरी होता है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है:बढ़ोतरी का कोई स्पष्ट आधार नहीं बताया गया,खर्चों का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया गया,निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहानिवासियों का आरोप है कि इस तरह के फैसलों से सोसायटी के मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।
सोसायटी परिसर में एकत्र हुए लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी की और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से तत्काल बढ़े हुए चार्जेस वापस लेने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्णय केवल जनरल बॉडी मीटिंग के माध्यम से ही लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाया जाएगा।
इस पूरे विवाद पर अब तक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे निवासियों में असंतोष और बढ़ गया है, क्योंकि वे इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब और समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
यह विवाद केवल एक सोसायटी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रेटर नोएडा पश्चिम सहित शहरी हाउसिंग सोसायटियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निवासी अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस को तेज कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन जैसे निकायों को वित्तीय फैसलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि इस तरह के विवादों से बचा जा सके।
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