चंडीगढ़ , अक्टूबर 01 -- पंजाब सरकार के सेवानिवृत्त विशेष मुख्य सचिव करन बीर सिंह सिद्धू ने गुरुवार को केंद्र की 1.86 लाख करोड़ रुपये की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण (तृतीय) योजना में पंजाब की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार से तत्काल परियोजना प्रस्ताव तैयार करने का आग्रह किया है।
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को मंजूर योजना के तहत राज्यों के भीतर नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 1.36 लाख करोड़ रुपये की पारेषण व्यवस्था और 50,000 करोड़ रुपये की लागत से 50 गीगावाट-घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने का प्रावधान किया है। योजना का लक्ष्य 2032-33 तक 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी की सुविधा देना है।
श्री सिद्धू ने कहा कि योजना में राज्य के भीतर पारेषण व्यवस्था की लागत के करीब एक-तिहाई हिस्से के लिए केंद्रीय सहायता का प्रावधान है, जबकि बैटरी भंडारण के लिए सहायता अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने कहा कि पंजाब को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार परियोजना रिपोर्ट के साथ जल्द पहल करनी चाहिए। उन्होंने पंजाब के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में बिजली विभाग के प्रशासनिक सचिव के नेतृत्व में एक कार्य समूह गठित कर नहरों के ऊपर सौर पैनल, पराली से बायोमास ऊर्जा, सौर कृषि फीडर और धान के मौसम में मांग पूरी करने के लिए पीएसटीसीएल के उपकेंद्रों पर बैटरी भंडारण जैसी परियोजनाओं की रिपोर्ट तैयार करने का सुझाव दिया है।
श्री सिद्धू के अनुसार, पंजाब ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के पहले दो चरणों में शामिल नहीं था, जबकि नयी योजना में ऐसे राज्योंको भी उपलब्ध/अवितरित निधि से परियोजनाएं मंजूर करने की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि पंजाब को इस अवसर कालाभ उठाने के लिए शीघ्र पहल करनी चाहिए। उन्होंने पारेषण टावरों के लिए भूमि देने वाले किसानों के लिए उचित मुआवजे की अधिसूचना जल्द जारी करने तथा केंद्र से राज्यवार आवंटन, परियोजना की समय-सीमा और नवीकरणीय ऊर्जा में कटौती के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग भी की।
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