अमरोहा , अक्टूबर 03 -- गन्ना किसानों के लंबित ब्याज भुगतान और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के साथ अब खेती की लागत और किसानों की आय का मुद्दा भी ग्राम महापंचायतों में उठाया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा की ओर से तीन से 23 अक्टूबर तक प्रस्तावित ग्राम महापंचायतों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), गन्ना बकाया, कृषि ऋण, भूमि अधिकार और किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि खेती-किसानी देश की रीढ़ है, इसलिए किसानों को किसी विशेष सुविधा के बजाय उनकी उपज का उचित मूल्य और सरकारी नीतियों में समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान की लागत, जोखिम और मेहनत को ध्यान में रखे बिना खाद्यान्न की कीमत तय करने से कृषि परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि महापंचायतों में एसआईआर के अलावा किसानों की लंबित मांगों पर भी चर्चा होगी। छह अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय में गन्ना किसानों के विलंबित भुगतान पर ब्याज से जुड़े मामले की सुनवाई और 26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन को देखते हुए इन बैठकों को संगठन की जमीनी तैयारियों से जोड़ा गया है।
गन्ना किसानों के ब्याज के मुद्दे पर चौधरी ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक सरदार वीएम सिंह के कानूनी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार सरकार ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है और छह अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
श्री चौधरी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को छोड़कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल समेत कई राजनीतिक दलों ने अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अमरोहा-मुरादाबाद क्षेत्र में किसान संगठन एसआईआर के दौरान ग्रामीण, बुजुर्ग और प्रवासी मतदाताओं के सामने आने वाली संभावित दिक्कतों को भी उठाने की तैयारी कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि पुराने दस्तावेजों का अभाव, नाम-पते में अंतर या सत्यापन के समय घर पर मौजूद नहीं होने जैसी स्थितियां पात्र मतदाताओं के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। हालांकि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का निर्णय निर्धारित पुनरीक्षण प्रक्रिया और दावों-आपत्तियों के आधार पर ही होगा।
इससे पहले गजरौला ब्लॉक के कशेरुआ गांव में आयोजित 'किसान युवा संसद' में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा हुई। युवाओं ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने, वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, गन्ने के बकाये का समय पर भुगतान और विलंबित भुगतान पर ब्याज देने की मांग उठाई।
नरेश चौधरी ने कहा कि किसान युवा संसद का उद्देश्य युवाओं को गांव की समस्याओं पर सवाल उठाने तथा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जवाबदेही तय कराने के लिए तैयार करना है। मुरादाबाद के भगतपुर रामबती इंटर कॉलेज में प्रस्तावित किसान युवा संसद में भी इन मुद्दों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर तक होने वाली बैठकों में आगे की रणनीति तय की जाएगी और इसके बाद 26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन को तेज करने की तैयारी होगी।
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