पटना, मई 16 -- िहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से संचालित बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति ग्रामीण जीवन में व्यापक परिवर्तन ला रही है। इस नीति के तहत ग्रामीण सड़कों के नियमित अनुरक्षण और मरम्मत के कारण अब गाँवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित हुआ है। विभाग द्वारा लागू इस नीति का उद्देश्य ग्रामीण सड़कों को लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण और उपयोगी बनाए रखना है। विशेष रूप से मानसून और वर्षा ऋतु के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जलजमाव और क्षति की समस्या को देखते हुए अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है, जिससे बरसात के दिनों में भी ग्रामीण संपर्कता बाधित नहीं हो रही है।
उल्लेखनीय है कि बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों में कुल 16,166 ग्रामीण सड़कों को शामिल किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 40,240 किलोमीटर है। इन सड़कों को बेहतर स्थिति में बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर अनुरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में राज्य स्तर पर अब तक 15,497 ग्रामीण सड़कों का प्रारंभिक सुधार कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिसकी कुल लम्बाई लगभग 37,841 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त 15,566 ग्रामीण सड़कों की 37,690 किलोमीटर से अधिक लंबाई में सतह नवीनीकरण भी पूरा किया जा चुका है। इन कार्यों के माध्यम से पुरानी और क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प कर उन्हें सुदृढ़ और सुरक्षित बनाया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क अनुरक्षण के इस व्यापक अभियान का सबसे सकारात्मक प्रभाव शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। अब विद्यार्थियों को विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुँचने में कम समय लग रहा है तथा बरसात के मौसम में भी उनकी आवाजाही बाधित नहीं हो रही है। वहीं आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच भी अधिक तेज एवं निर्बाध हुई है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध हो पा रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग अंतिम गाँव तक सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण सड़क संपर्कता उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण जनजीवन को अधिक सुगम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
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