पटना, अप्रैल 13 -- बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।

अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में प्रयोगशाला, प्रमंडल एवं अंचल स्तर की जाँच एवं गुणवत्ता नियंत्रण इकाई के पदाधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न इस बैठक में निर्माण कार्यों की निरंतर निगरानी, आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण और विभागीय जवाबदेही तय करने के लिए कई कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

इस समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी गुणवत्ता नियंत्रण पदाधिकारियों को हर महीने कम से कम 20 निर्माणाधीन पथों या पुलों की सघन जांच करनी होगी। पूर्ण पारदर्शिता के लिए अधिकारियों को कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट के साथ एमआईएस पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।

निगरानी तंत्र को और सख्त करते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि रूटीन निरीक्षण की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर अपलोड करना है और जन शिकायतों की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर अनिवार्य रूप से मुख्यालय को समर्पित करना होगा। इसके साथ ही पीक्यूसी कार्यों में कंक्रीट की मजबूती परखने के लिए ढलाई के समय ही कार्यस्थल से नमूना लेना आवश्यक होगा, जिसकी पूर्व सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी होगी।

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