नयी दिल्ली , सितंबर 04 -- बीएलएस ई-सर्विसेज के एक सर्वे के अनुसार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बीमार व्यक्तियों के अस्पताल में भर्ती होने की दर मात्र 1.25 प्रतिशत है।
बीएलएस ने यह अध्ययन इंश्योरटेक कंपनी फिनहाट के साथ मिलकर किया है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सामने आयी है।
इस सर्वे पर आधारित शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अध्ययन में देश के 85 प्रतिशत से ज्यादा पिन कोड क्षेत्रों से जुड़े 80,000 से अधिक हॉस्पिकैश क्लेम्स बीमा सुविधा वाले अस्पतालों को शामिल किया गया जिसमें जिसके तहत अस्पताल में भर्ती होने पर आपको हर दिन का एक तय नकद धन मिलता है।
विज्ञप्ति के अनुसार, " इस सर्वे में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में भर्ती होने की दर सिर्फ 1.25 प्रतिशत है, जबकि शहरी और व्हाइट-कॉलर बीमित लोगों में यह दर 5 प्रतिशत से ज्यादा है। दोनों समूहों की आय लगभग समान होने के बावजूद यह बड़ा अंतर देखने को मिला।"अध्ययन के अनुसार, " ग्रामीण लोग इलाज नहीं कराना चाहते, ऐसा नहीं है। असली समस्या यह है कि उनके आसपास इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।" बीएलएस ई-सर्विसेज के मुख्य परिचालन अधिकारी लोकनाथ पांडा ने कहा: "इन आंकड़ों से एक बात साफ है कि ग्रामीण भारत में लोग इलाज नहीं कराना चाहते, ऐसा नहीं है। असली समस्या यह है कि उनके लिए इलाज की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं है। बीएलएस ई-सर्विसेज में हम 399 रुपये वार्षिक के प्रीमियम की हॉस्पिकैश योजना के जरिए इस दिशा में काम कर रहे हैं।"कंपनी ने कहा है कि यह अध्ययन कम कीमत वाले स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी अपनी तरह के बडी स्टडिज में से एक है। इसमें कामकाजी उम्र के लोगों में स्वास्थ्य जोखिम, इलाज कराने के तरीके और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी मिली है।
फिनहाट के सह-संस्थापक एवं समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद सिंह ने कहा, " जब समान आय वाले लोगों में ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में भर्ती होने की दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में सिर्फ एक-चौथाई है, तो यह साफ है कि समस्या इलाज की जरूरत या मांग की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की है। हमारा ध्यान ऐसे बीमा उत्पाद और आसान क्लेम प्रक्रिया तैयार करने पर रहेगा, जिससे जरूरतमंद लोगों को आसानी से मदद मिल सके।"इस अध्यन के मुख्य निष्कर्ष है कि गांवों में लोगों को इलाज की सुविधा आसानी से नहीं मिलती। जिन राज्यों में सरकारी अस्पतालों में अच्छी सुविधाएं हैं, वहां गांवों में अस्पताल में भर्ती होने की दर भी ज्यादा है। कम कीमत (प्रीमियम) वाले बीमा के लिए तकनीक जरूरी है ताकि सही क्लेम जल्दी और आसानी से पूरे किये जा सकते हैं।
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