अलवर , जुलाई 24 -- राजस्थान में अलवर के सरिस्का बाघ अभयारण्य में तुलसीवाला गांव में गत दिनों बाघ को सुरक्षित पकड़ने के दौरान हुए विवाद के बाद पहली बार वन विभाग और ग्रामीण आमने-सामने बैठे।
बाघ परियोजना सरिस्का की उप वन संरक्षक के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए सभी गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए 11 सदस्यीय समन्वय समिति गठित करने की मांग की।
बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से श्रीमती शकुंतला देवी रावत, श्री रोहिताश घांघल, स्थानीय सरपंच सहित अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे। ग्रामीणों ने उप वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि बाघ के बचाव कार्य के दौरान हुए विवाद के मामले की विस्तृत जांच के लिए विभागीय समिति बनाई जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम के तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।
उल्लेखनीय है कि गत दिनों तुलसीवाला गांव में एक बाघ के पहुंचने से दहशत फैल गई थी। इसी दौरान एक युवक बाघ के हमले में घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग का दल जब बाघ काे पकड़ने का प्रयास कर रहा था, तब बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और आक्रोशित लोगों ने वन विभाग के दल पर पथराव करके मारपीट की। इस हिंसक घटना में कई वनकर्मी घायल हुए, विभागीय वाहनों को नुकसान पहुंचा और बचाव अभियान भी प्रभावित हुआ।
घटना के बाद वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा। इसके चलते ग्रामीणों और वन विभाग के बीच संवाद की आवश्यकता महसूस की गई।
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