वाराणसी , मार्च 1 -- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को कहा कि राज्य में गौ-संरक्षण के मुद्दे पर शासन की विफलता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का समय दिया गया था, जिसमें से 30 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। शेष अवधि में निर्णय न होने पर 'गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' का शंखनाद किया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनकी विदेश यात्रा को शिथिलता का बहाना नहीं बनाया जा सकता। शंकराचार्य के अनुसार उनकी दो प्रमुख मांगें हैं कि गोमाता को 'राज्यमाता' घोषित किया जाए और उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही गोहत्या निरोध के समर्थन में प्रस्तुत 'पंचसूत्रीय मांगपत्र' पर सरकार और संबंधित नेताओं की चुप्पी पर उन्होंने सवाल उठाए।

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित 'गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक होगा। उन्होंने कहा कि उनका अस्त्र 'शास्त्र और संवाद' है, हिंसा नहीं। शासन को उसकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारियों का स्मरण कराने के लिए 7 मार्च से 'गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा' लखनऊ की ओर प्रस्थान करेगी।

छह मार्च को चैत्र कृष्ण तृतीया के अवसर पर काशी के शंकराचार्य घाट पर गंगा पूजन कर संकल्प दिवस मनाया जाएगा। इसके उपरांत 7 मार्च को प्रातः श्री विद्या मठ से यात्रा प्रारंभ होगी। काशी के प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर में हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण के पाठ के साथ यात्रा का श्रीगणेश होगा।

यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज, उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य होते हुए 10 मार्च को लखनऊ सीमा में प्रवेश करेगी। विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित कर जनसंवाद किया जाएगा। 11 मार्च को लखनऊ स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक निर्णायक शंखनाद कार्यक्रम आयोजित होगा। कार्यक्रम में मंगलाचरण, गोमय गणेश पूजन, गो-ध्वज प्रतिष्ठा और धर्मयुद्ध शंखनाद सहित संतों व विद्वानों के उद्बोधन होंगे।

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