रायबरेली , अगस्त 11 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में गौशालाओं के गोबर से बायो कम्पोस्ट खाद तैयार कराने की पहल की गई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अमावां, बछरावां, सलोन, डलमऊ, महराजगंज और डीह विकास खंडों की गौशालाओं के साथ समन्वय कर 15 स्वयं सहायता समूहों की 180 महिलाओं को इस कार्य से जोड़ा गया है।
उपायुक्त श्रम रोजगार प्रमोद सिंह ने मंगलवार को बताया कि महिलाओं द्वारा जून से गौशालाओं से प्राप्त गोबर का प्रसंस्करण कर बायो कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। अब तक करीब 250 से 300 टन बायो कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा चुका है। उत्पादन की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन के लिए रायबरेली की एवरग्रीन ऑर्गेनिक कम्पनी के साथ स्वयं सहायता समूहों का अनुबंध कराया गया है।
उन्होंने बताया कि बायो कम्पोस्ट की बिक्री के लिए सहकारिता और कृषि विभाग के उर्वरक बिक्री केंद्रों के साथ भी समूहों का समन्वय और अनुबंध कराया गया है, जिससे उत्पाद को किसानों तक पहुंचाया जा सके ।
इसी क्रम में 30 जुलाई को राही विकास खंड के बी-पैक्स उतरपारा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बायो कम्पोस्ट बिक्री कार्यशाला शुरू की गई। कार्यशाला में किसानों ने 50 बोरी बायो कम्पोस्ट खरीदा। किसानों की ओर से लगातार मिल रही मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने और अधिक महिलाओं को इस गतिविधि से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस पहल से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का नया स्रोत मिलने के साथ गौशालाओं से निकलने वाले गोबर का वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन भी हो रहा है। प्रशासन का उद्देश्य अन्य गौशालाओं में भी बायो कम्पोस्ट उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाकर अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार से जोड़ना है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।
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