रायपुर , अक्टूबर 16 -- छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में चिकित्सकों ने समय से पूर्व जन्मे महज 900 ग्राम वजन के गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का सफल उपचार किया है। करीब दो माह तक विशेष चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद शिशु का वजन बढ़कर एक किलो 350 ग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे आठ अक्टूबर को जिला अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
स्वास्थ्य विभाग से शुक्रवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पहले हुआ था। जन्म के समय उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। शिशु को सांस लेने में परेशानी के साथ गंभीर रक्ताल्पता की समस्या भी थी। स्थिति गंभीर होने के कारण उसे जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि उपचार के दौरान नवजात को लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन की सहायता दी गई। गंभीर रक्ताल्पता के कारण उसे दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। इसके अतिरिक्त शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कंगारू मदर केयर पद्धति तथा नियमित आहार व्यवस्था के माध्यम से विशेष देखभाल की गई।
लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के परिणामस्वरूप शिशु की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। लगभग दो माह के उपचार के दौरान उसका वजन 900 ग्राम से बढ़कर एक किलो 350 ग्राम पहुंच गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार के बाद चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला चिकित्सालयों में संचालित विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां समय से पूर्व जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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