गौतमबुद्धनगर , सितंबर 03 -- उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्धनगर साइबर अपराध थाना पुलिस ने पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने फर्जी लोन सैंक्शन लेटर भेजकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठने वाले गिरोह से जुड़े दो वांछित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर गत बुधवार को जनपद गाजियाबाद के खोड़़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया।

साइबर अपराध पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी दी और बताया कि, यह गिरोह रुलओंस कंपनी से प्राप्त डाटा का कथित रूप से दुरुपयोग करता था। गिरोह के सदस्य लोन की जरूरत रखने वाले लोगों से संपर्क कर उन्हें पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद विश्वास में लेने के लिए उन्हें फर्जी लोन सैंक्शन लेटर भेजा जाता था। लोन स्वीकृत होने की बात कहकर आरोपियों द्वारा प्रोसेसिंग फीस सहित अन्य शुल्क के नाम पर पीड़ितों से रकम जमा कराई जाती थी।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार पुत्र कपिल देव और सुमित कुमार पुत्र रामेश्वर प्रसाद, दोनों गाजियाबाद के खोड़़ा कॉलोनी खोड़़ा थाना क्षेत्र के निवासी के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 21 वर्ष है।

मामले में साइबर अपराध थाना में मु0अ0सं0 145/2025 दर्ज है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 238 तथा 66D आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों पुलिस को जानकारी मिली कि वे साइबर अपराधियों को ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते और अन्य म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी तुषार के बैंक खाते में करीब 1.20 लाख रुपये और सुमित के बैंक खाते में करीब 2.20 लाख रुपये प्राप्त हुए। दोनों खातों में कुल 3.40 लाख रुपये की धनराशि साइबर ठगी से संबंधित बताई गई है।

आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से कुल दो शिकायतें दर्ज हैं। इनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु की शिकायतें शामिल हैं। पुलिस इन खातों में हुए लेनदेन और उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों की भी जांच कर रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अपने बैंक खाते तथा अन्य म्यूल बैंक खातों को साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों में ठगी की रकम आने के बाद आरोपी अपना निर्धारित कमीशन काट लेते थे और शेष रकम संबंधित साइबर अपराधियों तक पहुंचा देते थे। इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

मामले में अन्य सहयोगियों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

इस मामले में पुलिस द्वारा इससे पहले भी 15 दिसंबर 2025 को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब दो और वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है।

साइबर अपराध पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन, व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से दिए गए लोन, निवेश या अन्य आकर्षक ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक को ओपन न करें और अपना आधार, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा न करें।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर डराता है और डिजिटल अरेस्ट करने की बात करता है, तो घबराने के बजाय तत्काल पुलिस या साइबर पुलिस से संपर्क करें।

इसी तरह अश्लील वीडियो, मादक पदार्थों, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, फर्जी इंपोर्ट-एक्सपोर्ट या किसी अन्य अपराध में संलिप्त होने का डर दिखाकर यदि कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है, तो किसी भी कीमत पर रकम ट्रांसफर न करें।

साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें या साइबर सेल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने से ठगी की रकम को फ्रीज कराने और आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिल सकती है।

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