गौतमबुद्धनगर , अक्टूबर 16 -- उत्तर प्रदेश में जनपद गौतमबुद्धनगर साइबर अपराध पुलिस ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है।
साइबर अपराध पुलिस ने शुक्रवार बताया कि,आरोपी रुपये लेकर टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से साइबर अपराधियों को म्यूल खाते उपलब्ध कराता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन में किया जाता था। आरोपी के बैंक खाते में करीब 2,15,743 रुपये आए थे, जबकि खाता उपलब्ध कराने के बदले उसे 50 हजार रुपये मिले थे। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध में इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
पुलिस ने यह कार्रवाई अभिसूचना संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रय्यान अंसारी पुत्र सिंकदर अंसारी के रूप में हुई है। वह ईस्ट दिल्ली जगत पुरी, कृष्णा नगर, थाना जगतपुरी, का निवासी है और उसकी उम्र करीब 22 वर्ष बताई गई है। पुलिस मामले में आरोपी की भूमिका और बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
पूछताछ में सामने आया कि वह रुपये लेकर साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इसके लिए वह टेलीग्राम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करता था। आरोपी ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को दे रखे थे। इन बैंक खातों में करीब 2,15,743 रुपये की रकम आई थी। इसके बदले आरोपी को 50 हजार रुपये मिले थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए संबंधित बैंक खातों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दो शिकायतें दर्ज हैं। इनमें एक शिकायत उत्तर प्रदेश और दूसरी आंध्र प्रदेश से संबंधित है। पुलिस इन शिकायतों और खातों के जरिए हुए संदिग्ध लेन-देन के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
साइबर अपराध थाना में आरोपी के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 373/2026 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराध में किए जाने की बात सामने आई है।
साइबर अपराध पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कमीशन, किराये या अधिक कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को स्थानांतरित करने के लिए किया जा सकता है, जिससे खाताधारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
पुलिस ने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर मिलने वाले अधिक मुनाफे वाले निवेश तथा पार्ट-टाइम नौकरी के संदिग्ध प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी है। लोगों को ओटीपी, पिन, सीवीवी और इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने को कहा गया है। बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन दिखने पर तुरंत संबंधित बैंक को सूचना देने की अपील की गई है। साइबर धोखाधड़ी होने पर पीड़ित राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं या डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.साइबरक्राइम.जीओवी.इन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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