मथुरा 31मई(वार्ता) उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गोवर्धन क्षेत्र में रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) और उनके बाबू (लिपिक) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगने और वीडियो बनता देख अधिकारी अपनी सरकारी गाड़ी लेकर मौके से भागते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद रोडवेज विभाग में हड़कंप मच गया है।
घटना के संबंध में पीड़ित रोडवेज परिचालक (कंडक्टर) मोहन सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया को आपबीती बताई। परिचालक के अनुसार, वह रोडवेज की बस को लेकर मथुरा से बरसाना की ओर जा रहा था। पुरुषोत्तम मास मेले के चलते बस में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और कुल 72 यात्री सवार थे। परिचालक ने बताया कि वह ईमानदारी से सभी यात्रियों की टिकट काट रहा था और 63 यात्रियों की टिकट बनाई जा चुकी थी, जबकि शेष यात्रियों की टिकट काटने की प्रक्रिया जारी थी। इसी दौरान रास्ते में एआरएम के साथ आए बाबू ने जबरन बस को रुकवा लिया।
परिचालक मोहन सिंह का आरोप है कि बस को रोकने के बाद एआरएम के साथ आए बाबू ने टिकट चेकिंग के बहाने उससे अवैध रुपयों (घूस) की मांग शुरू कर दी। जब परिचालक और चालक ने इस अवैध वसूली का कड़ा विरोध किया और अधिकारियों की इस करतूत को बेनकाब करने के लिए अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया, तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। खुद को कैमरे में कैद होता देख एआरएम और बाबू आनन-फानन में अपनी सरकारी गाड़ी में बैठे और मौके से रफूचक्कर हो गए।
अधिकारियों के इस तरह गाड़ी भगाकर ले जाने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिससे परिवहन विभाग की साख पर बट्टा लगा है। स्थानीय लोगों और रोडवेज कर्मियों का कहना है कि मेले के नाम पर चेकिंग के बहाने सीधे-सादे कर्मचारियों को प्रताड़ित कर अवैध वसूली का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। परिचालक ने उच्च अधिकारियों से मामले की शिकायत कर दोषी एआरएम और बाबू के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
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