भिण्ड , सितंबर 13 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में घूम रहे गोवंश को लेकर जिला पंचायत ने पंचायतों की जिम्मेदारी तय करते हुए आठ सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान ने निरीक्षण के दौरान गोवंश के सड़कों और किसानों की फसलों में घूमते मिलने पर यह कार्रवाई की है। सभी सरपंचों को 15 सितंबर को साक्ष्य सहित अपना पक्ष रखने के लिए समक्ष में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जनपद पंचायत भिण्ड की मानपुरा पंचायत के सरपंच ओमवीर सिंह चौहान, बाराकलां की सरपंच ममता बघेल, ऊमरी के सरपंच वीरेंद्र सिंह यादव, ढोंचरा के सरपंच सुनील कुमार और खेरा श्यामपुरा की सरपंच प्रीति देवी को नोटिस जारी किए गए हैं। इसी तरह जनपद पंचायत लहार की लपवाहा पंचायत के सरपंच अरविंद शर्मा, ररी पंचायत की सरपंच सावित्री बाई और जनपद पंचायत रौन की मेहदा पंचायत की सरपंच उमा देवी से भी जवाब मांगा गया है।

सीईओ के निरीक्षण के दौरान इन पंचायतों में गोवंश सड़क, सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थानों और किसानों की फसलों में घूमता मिला। नोटिस में कहा गया है कि इससे जन-धन की हानि के साथ परिवहन में परेशानी और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पंचायत स्तर पर गोवंश को सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने को पदीन कर्तव्य के विपरीत माना गया है।

सीईओ ने पूछा है कि पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई क्यों न की जाए। 15 सितंबर को सरपंचों को साक्ष्य सहित अपना पक्ष रखना होगा। समय पर जवाब नहीं देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इन पंचायतों में शासन की ओर से गोशालाओं का निर्माण कराया गया है और इनके निर्माण एवं संचालन पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। गोवंश के लिए भूसा-दाना, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी राशि खर्च होती है। इसके बावजूद कई स्थानों पर गोशालाएं खाली पड़ी हैं और गोवंश सड़कों पर घूम रहा है। ऐसे में गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए पंचायत स्तर पर की जा रही व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

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