नयी दिल्ली , फरवरी 20 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सूक्ष्म, लघु और मझोले वर्ग के उद्यमों (एमएसएमई) के निर्यात को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिये मजबूत करने के लिए शुक्रवार को निर्यात संवर्धन मिशन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हाल के व्यापार समझौतों में भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक जीडीपी में 70 प्रतिशत योगदान कर रहे देशों में भारतीय माल को वरीयता के आधार पर प्रवेश की सुविधा की गयी है।

उन्होंने इस मिशन के तहत सात अतिरिक्त समाधानों को शुरू किये जाने की घोषणा की जो देश के निर्यातकों के सामने कर्ज की समस्या, विदेशी बाजारों में विस्तार के लिए मानकों आदि की चुनौतियों से निपटने तथा लॉजिस्टिक्स आदि की समस्या से निपटने में मदद करने के लिए हैं। इसके लिए वाणिज्य भवन में निर्यात इकाइयों के साथ आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

श्री गोयल ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए विश्व स्तर पर बड़ी संख्या में बाजारों का रास्ता आसान किया है। उन्होंने कहा कि अब तक अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौतों समेत नौ समझौतों में शामिल देश सकल वैश्विक उत्पाद (वैश्विक जीडीपी) में लगभग 70 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने कहा , ' ये समझौते 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के बाजार में हर उस वस्तु के मामले में भारतीय निर्यातकों को वरीयता के आधार पर प्रवेश दिलाते हैं जिनका वहां आयात किया जाता है।

वाणिज्य मंत्री ने अमेरिका के साथ समझौते में भारत के किसानों के हित से साथ सौदा किये जाने के आरोपों को पुन: खारिज करते हुए कहा 'भारत आज विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आत्मविश्वास के साथ जुड़ता है, अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करता है और प्रतिस्पर्धा की शक्ति वाले क्षेत्रों में फायदा हासिल करता है।"उन्होंने कहा कि भारत ने 2022 में विदेशों के साथ व्यापार में जुड़ाव तेज़ किया है, माल और सेवा के कारोबार तथा निवेश में भागीदारी बढ़ायी है, घरेलू स्तर पर कारोबारियों के लिए अनुपालन का बोझ कम किया है, कई कानूनों में जेल की सजा के प्रावधान हटा दिये गये हैं और कारोबार करने में अधिक आसानी की है।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन में दो स्तम्भ है जिनमें एक 'निर्यात प्रोत्साहन' का और दूसरा 'निर्यात दिशा' का स्तम्भ है। 'निर्यात प्रोत्साहन के तहत वित्तीय प्रोत्साहन और कर्ज सुविधाएं बढ़ने और 'निर्यात दिशा' के तहत व्यापार के परिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और अनुुकूलन के लिए सहायता करना है।इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपना गया है। इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए एक एकीकृत और डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था की गयी है।

इस मिशन को वाणिज्य विभाग, एमएसएमई मंत्रालय, फाइनेंस मंत्रालय, एक्जिम बैंक, माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीअीएमएसई), नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड , विनियमित ऋण संस्थानों , विदेश में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स के साथ समन्वय करके लागू किया जा रहा है।

निर्यात प्रोत्साहन के तहत शुरू किए गए वित्तीय हस्तक्षेप के अंतर्गत निर्यातकों को कर्ज की वैकल्पिक सुविधा दिलाने के लिए एमएसएमई को 2.75 प्रतिशत ब्याज छूट के साथ निर्यात फैक्टरिंग की सुविधा , ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात के लिए कर्ज सुविधा और उभरते और जोखिम भरे नये बाजारों में प्रवेश के लिए वित्तीय मदद शामिल है।

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