हल्द्धानी , अप्रैल 13 -- उत्तराखंड सरकार की ओर से एक अप्रैल से गेहूं खरीद के कांटे सुचारु करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। इससे नाराज किसानों का गुस्सा अब सड़क पर दिखाई देने लगा है ,मंडियों में गेहूं खरीद के कांटे शुरू न होने से किसान आक्रोशित हो गए गुस्साए किसानों ने आज हल्द्धानी आईएफसी दफ्तर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।

किसानों का कहना है कि कई दिनों से वे अपनी फसल लेकर मंडी में बैठे हैं लेकिन खरीद की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, किसान नेताओ का कहना है कि सरकार ने एक अप्रैल से खरीद शुरू करने की बात कही थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ हम लोग कई दिनों से परेशान हैं, अगर जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो आंदोलन और तेज करेंगे किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि परसों तक गेहूं खरीद के कांटे सुचारु नहीं किए गए तो वे कांटों को उखाड़कर मंडी से बाहर फेंक देंगे और उग्र आंदोलन करेंगे अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की इस चेतावनी के बाद कितनी जल्द व्यवस्था को पटरी पर ला पाता है।

वहीं मामले में उप क्षेत्रीय विपणन अधिकारी आकृति मिश्रा ने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा गेहूं खरीद को लेकर सामने आई उन्होंने कहाँ इस बार खरीद कम होने के पीछे मुख्य कारण बाजार में ऊंचे दाम रहे। जब ओपन मार्केट में गेहूं का रेट सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक हो जाता है, तो किसान स्वाभाविक रूप से खुले बाजार में बिक्री को प्राथमिकता देते हैं, जिससे सरकारी खरीद प्रभावित होती है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को गेहूं खरीद की सीमित मात्रा निर्धारित की गई थी, जिसके चलते खरीद कम रह गई। अब इस स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस संबंध में विभागीय सचिव स्तर से भी केंद्र सरकार को पत्राचार किया गया है।

सरकार की ओर से किसानों को आश्वस्त किया गया है कि एक-दो दिन के भीतर केंद्र से नई सीमा मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद उपलब्ध मात्रा के अनुसार किसानों को गेहूं बेचने का अवसर दिया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित