बिलासपुर , नवंबर 01 -- छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन को सुगम बनाने और रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से निर्माणाधीन गेवरा-पेंड्रारोड ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरिडोर का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना के अंतर्गत पेंड्रारोड से भाड़ी स्टेशन के बीच 24 किलोमीटर लंबे नए रेलमार्ग पर इंजन का सफल परीक्षण किया गया है। इस दौरान रेलवे और इरकॉन के अधिकारी मौजूद रहे।

करीब 135 से 157 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना पर 3,000 से 3,923 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। गेवरा रोड-दीपका-कटघोरा-पसान-पेंड्रा रोड मार्ग पर विकसित किए जा रहे कॉरिडोर में रेल पटरी बिछाने के साथ पुल-पुलिया, अंडरब्रिज और ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) पोल लगाने का अधिकांश कार्य पूरा किया जा चुका है।

रेलवे अधिकारियों से आज मिली जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने से कोरबा जिले के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों को देश के उत्तरी राज्यों से जोड़ने के लिए अतिरिक्त रेलमार्ग उपलब्ध होगा। विशेष रूप से गेवरा और दीपका की खदानों से निकलने वाले कोयले की ढुलाई के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलने से मालगाड़ियों का परिचालन अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।

बिलासपुर के सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह ने बताया कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से कोरबा की गेवरा और दीपका खदानों से कोयला ढुलाई के लिए एक सीधा व वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के उद्योगों तक कोयले की आपूर्ति तेज और निर्बाध हो सकेगी। माल ढुलाई की बढ़ी हुई क्षमता से मौजूदा रेल नेटवर्क पर भी दबाव घटेगा।

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