Ladakh CS terms rejection of MHA draft 'unfortunate', says nothing is off the table Srinagar, Oct 17 (UNI) A day after the Leh Apex Body (LAB) and the Kargil Democratic Alliance (KDA) rejected the Centre's draft proposal on Ladakh's demands, Chief Secretary Ashish Kundra on Saturday termed the response "very unfortunate", saying the document was dismissed within two hours of its receipt without its clauses being examined in depth.Addressing a press conference in Leh, Kundra said the draft had been prepared after considerable effort and was open to suggestions, stressing that the Centre was willing to consider changes to reach a consensus on constitutional safeguards and the proposed democratic structure for Ladakh."I can only say that it is very unfortunate that the draft was rejected within two hours of being received, without perhaps going into the various clauses in depth. The document was prepared with considerable effort," he said.श्रीनगर, 17 अक्टूबर (वार्ता) लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के मसौदा प्रस्ताव को सिविल सोसायटी द्वारा खारिज किये जाने को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गयी संस्था स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस बातचीत में सभी विकल्पों पर चर्चा संभव है।
श्री कुंद्रा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह मसौदा काफी मेहनत के बाद तैयार किया गया था और इसमें सुझावों के लिए पूरी गुंजाइश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लद्दाख के लिए प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे पर आम सहमति बनाने के लिए बदलावों पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा, "मैं बस इतना कह सकता हूं कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मसौदा मिलने के दो घंटे के भीतर ही इसे खारिज कर दिया गया, जबकि शायद इसकी विभिन्न धाराओं को गहराई से देखा भी नहीं गया। इस दस्तावेज को तैयार करने में काफी मेहनत लगी थी।"श्री कुंद्रा ने कहा, "मैं एक बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं, यह सिर्फ एक मसौदा है और हम सुझावों के लिए खुले हैं। किसी भी विकल्प पर चर्चा से इनकार नहीं किया गया है।" उन्होंने बताया कि मसौदे में संवैधानिक सुरक्षा उपायों के प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने अनुच्छेद 371-के का जिक्र करते हुए लद्दाख के नेतृत्व से आग्रह किया कि वे अपने ठोस सुझाव दें और अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट करें।
उन्होंने कहा, "अगर नेताओं के पास कोई विचार या सुझाव हैं, तो उन्हें जरूर सामने रखना चाहिए। जैसा कि मैंने कहा, बातचीत के लिए धैर्य की जरूरत होती है और एक-दूसरे की बात समझने या तालमेल बिठाने की भावना होनी चाहिए।"श्री कुंद्रा ने कहा कि केंद्र ने लद्दाख में लोकतांत्रिक ढांचा स्थापित करने से जुड़े मुद्दों पर कई विकल्प दिये हैं और दूसरी तरफ से कोई जवाब मिले बिना केंद्र एकतरफा कदम नहीं उठा सकता। उन्होंने कहा, "हमने लद्दाख में लोकतांत्रिक ढांचा स्थापित करने से जुड़े कई मुद्दों पर कई विकल्प दिये हैं। हमें उन सवालों के जवाब चाहिए। हम एकतरफा कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि इस बातचीत में शामिल नेताओं में इतनी परिपक्वता और ईमानदारी है कि वे समझ सकें कि आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता बातचीत और समझौता ही है। उनके साथ अपनी निजी बातचीत में मैंने पाया कि उनका नेतृत्व समझदार, दूरदर्शी और लोकतांत्रिक है। जब दोनों पक्ष एक साथ आयें, तो यह प्रक्रिया सौहार्दपूर्ण और आम सहमति पर आधारित होनी चाहिए। मैं उनसे बस यही आग्रह कर सकता हूं।"श्री कुंद्रा ने बातचीत के दौरान असहमति के बिंदुओं के बारे में बताते हुए कहा कि लद्दाख के नेतृत्व की मुख्य आपत्ति प्रस्तावित निकाय के नाम को लेकर थी, जबकि दूसरा मुद्दा यह था कि मुख्य सचिव की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) कौन लिखेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित