नयी दिल्ली , जनवरी 27 -- अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के मताधिकार को लेकर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि आजादी के लगभग 77 साल बाद भी पात्र छात्र मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग प्रभावी रूप से चुनावी प्रक्रिया से बाहर है। कर्मचारियों के विपरीत छात्रों के पास ऐसा कोई संस्थागत तंत्र नहीं है, जो उन्हें मत देने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वापस जाने में सक्षम बनाए। शैक्षणिक कार्यक्रम, परीक्षाएं, यात्रा की लागत और अन्य व्यावहारिक बाधाएं उनकी चुनाव में भागीदारी को और अधिक सीमित कर देती हैं।
याचिका में यह भी बताया गया है कि छात्रों को पोस्टल बैलेट या किसी वैकल्पिक मतदान तंत्र के माध्यम से मत देने की अनुमति नहीं है। इसके परिणामस्वरूप अपने पैतृक स्थानों से दूर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा मतदाताओं से बड़े पैमाने पर मताधिकार छिन जाता है।
यह मुद्दा तमिलनाडु नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 2024 बैच के छात्र जयसुधागर जे. द्वारा एक चुनाव कानून शोध परियोजना के आधार पर शीर्ष अदालत के समक्ष लाया गया है। इस शोध में मतदाता आबादी के भीतर छात्रों को शामिल करने के संबंध में मौजूदा चुनावी ढांचे में एक संवैधानिक कमी की पहचान की गई थी और छात्र समुदाय के प्रभावी मतदान अधिकारों के हनन की जांच की गई थी।
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