नैनीताल , दिसंबर 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुलरभोज के ठंडानाला में आरक्षित वन क्षेत्र में रह रहे छह परिवारों को हल्की राहत देते हुए सक्षम अधिकारी के समक्ष दावा प्रस्तुत करने तथा सिंचाई विभाग को कार्रवाई से पहले उन्हें कुछ वक्त देने को कहा है।
छह ग्रामीणों की ओर से सिंचाई विभाग की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी गई है। इस मामले में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सिंचाई विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर हटाया जा रहा है। कई सालों से वे यहां रह रहे हैं। हटाये जाने से पूर्व उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने अतिक्रमणकारियों को हटाने से पूर्व एक कमेटी का गठन करने और उनके दावों को सुनने के निर्देश दिए हैं लेकिन आज तक कोई कमेटी गठित नहीं की गई है। गांव के 26-27 परिवारों को विभाग हटा चुका है।
प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि यह आरक्षित वन क्षेत्र है। यह भूमि वर्ष 1967 में हरिपुरा जलाशय को सौंपी गई है और प्रावधानों के अनुसार जलाशय की अतिरिक्त भूमि को वापस वन विभाग को सौंपी जाएगी।
इसी के तहत विभाग कार्रवाई कर रहा है। इन परिवारों को 15 दिसंबर तक स्वयं भूमि खाली करने को कहा गया था।
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