श्रीनगर , मार्च 18 -- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने गुलमर्ग होटलों के भूमि पट्टे के हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा सरकारी समाधान निकालने के लिए याचिका वापस लेने के अनुरोध के बाद रिट याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल की पीठ ने मार्च 2026 की शुरुआत में याचिकाकर्ताओं द्वारा विवाद सुलझाने के लिए सरकार के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के इरादे को देखते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दी थी।
उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने 2022 में, जम्मू-कश्मीर भूमि अनुदान नियम लागू किया जो केंद्र शासित प्रदेश में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का प्रतीक है। नई संरचना के अंतर्गत, पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद उसे बढ़ाने की प्रथा बंद कर दी गई है और ऐसी संपत्तियों की खुली नीलामी की जाएगी, जिससे वह किसी भी भारतीय नागरिक के लिए सुलभ होगी।
इसका असर गुलमर्ग के पर्यटन स्थल में विशेष रूप से पड़ेगा, जहां अधिकांश होटल पट्टे वाली भूमि पर बने हुए हैं। 59 होटलों में से 55 के पट्टे समाप्त हो चुके हैं जिससे मालिकों पर बेदखली एवं नीलामी का खतरा मंडरा रहा है।
उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई कई बार कर चुका था और याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं। हालांकि, सुनवाई के दिन अंतिम चरण में याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील जेड. ए. शाह ने याचिकाएं वापस लेने की अनुमति मांगी। वे अदालत में मुकदमा जारी रखने के बजाय प्रतिनिधि के माध्यम से विवाद को सुलझाने के लिए सरकार से संपर्क करना चाहते थे।
सरकार ने वरिष्ठ एएजी मोहसिन कादरी के माध्यम से अदालत को सूचित किया कि वह निष्पक्ष, उचित और न्यायसंगत समाधान के लिए तैयार है और आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ताओं की सुनवाई के बाद दो सप्ताह के भीतर दायर किसी भी अभ्यावेदन पर विधिवत विचार किया जाएगा।
अदालत ने दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि मामले के गुण दोषों की जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं है और तदनुसार याचिकाओं का निपटारा कर दिया। अदालत ने कई संबंधित अवमानना याचिकाओं को भी निरर्थक मानते हुए निपटा दिया, जबकि कुछ रिट याचिकाओं को वकीलों के निर्देश पर वापस लेने के कारण खारिज कर दिया।
हालांकि, अदालत ने पाया कि इस मामले पर पहले ही बहुत न्यायिक समय लग चुका था और अगर पक्षों का रुख नहीं बदला होता तो कार्यवाही संभवतः अब तक समाप्त हो चुकी होती।
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