अमृतसर , मार्च 20 -- गुरु नानक देव विश्वविद्यालय द्वारा शुक्रवार को 'गल्ल पंजाब दी: साडी मिट्टी, साडी सोच, साडा भविष्य' विषय पर एक ओरिएंटेशन कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और छात्रों ने राज्य के सामाजिक-आर्थिक भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य होने के नाते कृषि और सहायक क्षेत्रों में अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादकता को काफी बढ़ा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विदेश प्रवास करने के बजाय कृषि और संबंधित उद्योगों में अवसरों की तलाश करें और राष्ट्र के विकासमें योगदान दें।

विश्वविद्यालय की पहलों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति ने कहा कि छात्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान में पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ज्ञान आम जनता तक पहुंच सके।

यह कॉन्क्लेव कॉलेज विकास परिषद के डीन के सहयोग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ के निदेशक डॉ. राजीव आहूजा ने रेखांकित किया कि इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य शिक्षकों और छात्रों को शामिल करते हुए एक ऐसा शैक्षणिक मंच तैयार करना है, जो संवाद और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पंजाब की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान कर सके। उन्होंने बताया कि समाधान खोजने के लिए संकाय समन्वयकों और छात्र समूहों की पहचान की जाएगी।

सत्रों के दौरान, वक्ताओं ने राज्य के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की और तकनीकी समावेशन, नैतिक मूल्यों और युवा भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने तकनीक को किसानों तक सुलभ बनाने की बात कही, जबकि कर्नल सिंह पीर मोहम्मद ने युवाओं को अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित किया। माता चरण कमल कौर ने प्रगतिशील समाज के निर्माण में नैतिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

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