भोपाल, 05 नवंबर (वार्ता) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुरु नानक जी के उपदेश मानवता की सेवा का सर्वोच्च मार्ग है।
मुख्यमंत्री श्री यादव ने गुर नानक जयंती के अवसर पर आज यहां अरेरा कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा पहुंचकर माथा टेका और गुरुवाणी का श्रवण किया। उन्होंने सभी देशवासियों को गुरु पर्व की शुभकामनाएं दीं और वाहेगुरु जी से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं सबके कल्याण की मंगलकामना की।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव सामाजिक एकता, सद्भावना और सेवा भाव की मिसाल थे। उन्होंने मानवता की सेवा और सबके प्रति समानता का भाव रखने का जो संदेश दिया है, वह आज भी सर्व समाज के लिए प्रकाशपुंज है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक जी का जीवन सत्य, करुणा और परोपकार का प्रतीक है। उनका जीवन संदेश समय की सीमाओं से भी परे है और मानवता की सेवा के लिए हमेशा प्रेरणा-स्रोत रहेगा।
उन्होंने समाज जनों की मांग पर घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार गुरु तेग बहादुर का 350वां जयंती वर्ष और शहीदी दिवस धूमधाम से मनायेगी। उन्होंने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने वाले गुरु तेग बहादुर के सम्मान लिए प्रदेश सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव साक्षात ईश्वर समान थे, उन्होंने संसार को मानवता, सेवा और कीर्तन की शिक्षा और सिख धर्म की स्थापना की। उन्होंने भारत में पदयात्रा तो की ही, यहां से बाहर निकलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अरब तक सिख धर्म का प्रकाश पहुंचाया। उस दौर में अरब में गुरू नानक देव का जो प्रभाव था, वो बाबर के सामने भी रहा। हम सभी ओंमकार रूपी ध्वनि से सचेतन रहें। जातिगत भेदभाव को दूर करते हुए एक संगत में रहें। समाज में दूरियों को मिटाने के लिए किसी भी दिखावे की जरूरत नहीं है। मनुष्य, मनुष्य के काम आए और अन्याय के खिलाफलड़ें। अफगानी, मुगल और अंग्रेजों के सामने गुरूजी के मार्ग पर चलते हुए हमारे वीरों ने अपना बलिदान तक कर दिया। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास की पूर्णिमा पर प्रकाश पर्व अद्भुत है। गुरु नानक देव जी द्वारा सेवा और देश भक्ति के लिए दिया संदेश सभी को प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव की अमृतवाणी हमें सिखाती है कि सच्चे अर्थों में धर्म वही है, जो सबके हित में हो। हमारी सरकार भी गुरुनानक जी की उसी नेक भावना के अनुरूप जनकल्याण और सबके समुत्थान की राह पर अग्रसर है। गुरु नानक देव जी कहते थे - एक नूर से सब जग उपज्या, कौन भले, कौन मंद? एक ही साजे सब सुरतें, एक ही ज्योति अखंड। अर्थात् ईश्वर एक है, उसी का प्रकाश हर जीव में है। जब हम सब में उसी एक नूर को देखते हैं, तब भेदभाव मिट जाता है और सच्चा प्रेम प्रकट होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु नानक देव ने मनुष्य को जीवन का जो मार्ग दिखाया है, वह केवल उपदेश नहीं, एक सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। उनका मानना था कि ईश्वर के नाम जप से आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति मिलती है, तेज बढ़ता है। उन्होंने हमें ईमानदारी से जीवन यापन करना, मेहनत से काम करना और मिल-बांटकर खाना सिखाया। गुरु नानक देव ने लंगर की परंपरा शुरू की, जो सामाजिक समानता और भाईचारे का संदेश देता है। लंगर में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। गुरु नानक देव का जीवन सिख समुदाय के साथ हर भारतीय के लिए प्रेरणा पुंज हैं। उनके संदेशों में हमेशा विश्व को समता, सद्भावना, सदाचार और बंधुत्व पर जोर दिया है। आज के समय में गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। "गुरु ग्रंथ साहिब" के रूप के हमारे पास जो गुरुजी की अमृतवाणी है, उसकी महिमा ही अपार है।
उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव के दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम सेवा, समानता और संवेदनशीलता के साथ प्रदेश को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ा रहे हैं।
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