अमृतसर , मार्च 11 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा सिख संगत के सहयोग से सिख कौम के महान शहीद भाई तारा सिंह जी वां की 300वीं शहीदी शताब्दी के समारोहों की शुरुआत बुधवार को गुरुद्वारा शहीद भाई तारा सिंह जी, गांव वां से नगर कीर्तन की रवानगी के साथ हुई।

इस अवसर पर तख्त श्री दमदमा साहब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, शिरोमणि कमेटी सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता और धर्म प्रचार कमेटी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां सहित प्रमुख शख्सियतें और बड़ी संख्या में संगत मौजूद थी।

नगर कीर्तन की शुरुआत से पहले गुरुद्वारा साहब में धार्मिक दीवान सजाए गए, जिसमें सचखंड श्री हरिमंदर साहब के हजूरी रागी भाई सुखवंतजीत सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। अरदास भाई प्रेम सिंह ने की और जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने पालकी साहब में श्री गुरु ग्रंथ साहब जी का पावन स्वरूप सुशोभित करने की सेवा निभाई।

जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि यह माझे की वह धरती है, जहाँ अनेक सिख योद्धाओं ने गुरु साहब के सिद्धांतों पर पहरा देते हुए शहादत प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आज जब हम शहीद भाई तारा सिंह जी वां और अन्य शहीदों की 300वीं शताब्दी मना रहे हैं, तो हर सिख का कर्तव्य है कि शहीदों के इतिहास को याद करते हुए अपने बच्चों को गुरसिखी जीवन से जोड़ें।

शहीदी शताब्दी को समर्पित एसजीपीसी द्वारा श्री अकाल तख्त साहब से बीते दिनों शुरू हुआ 'गुरसिखा इको प्यार गुरमिता पुता भाईआ' नामक खालसा मार्च आज गुरुद्वारा जन्म स्थान बाबा दीप सिंह जी, गांव पहूविंड से चलकर गुरुद्वारा शहीद भाई तारा सिंह जी वां पहुँचकर जयकारों की गूंज में संपन्न हुआ। नगर कीर्तन की रवानगी के समय श्री अकाल तख्त साहब के कार्यकारी जत्थेदार और तख्त श्री केसगढ़ साहब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज, शिरोमणि कमेटी सदस्य भाई मनजीत सिंह सहित अन्य प्रमुख शख्सियतें उपस्थित थीं।

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